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सात्विक जीवन से योगी बने आचार्य अभय देव

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मुजफ्फरनगर। आर्य समाज नई मंडी में वैदिक साहित्य के पुरोधा, स्वाधीनता सेनानी आचार्य अभय देव की पुण्यतिथि पर वेद मंत्रों से यज्ञ में आहुतियां देकर नमन किया गया। आचार्य गुरुदत्त आर्य ने कहा कि भारतीय वैदिक संस्कृति की मूल भावना आध्यात्मिक है। स्वामी श्रद्धानंद की प्रेरणा से आचार्य अभय देव ने स्वाधीनता और वेद प्रचार में जीवन आहुति दी।
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महर्षि दयानंद मार्ग स्थित नई मंडी आर्य समाज में बुधवार प्रात: वेद मंत्रों से यज्ञ कर वेद मनीषी को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। आचार्य गुरुदत्त आर्य ने कहा कि परमात्मा ने ऋषियों, मुनियों, योगियों और पवित्र आत्माओं के द्वारा मानव को नैतिकता, संस्कृति, सदाचार, चरित्र और राष्ट्र सेवा की विद्या प्रदान की है। आचार्य अभय देव जिले की ऐसी महान विभूति थी, जिन्होंने वेदों की व्याख्या से भारत के प्रकांड विद्वानों में जगह बनाई। उनकी सात्विकता और योगी जीवन अतुल्नीय है। शुकतीर्थ से आए स्वामी सत्यवेश ने कहा कि स्वदेश प्रेम की भावना उनमें कूट-कूट कर भरी थी। नि:स्वार्थ भाव से आजादी के आंदोलन में भाग लिया। आंदोलनकारी मास्टर विजय सिंह ने कहा कि वैदिक विनय ग्रंथ के अध्ययन से वैदिक संस्कृति की महत्ता का ज्ञान होता है। युवा पीढ़ी उनके जीवन व्यक्तित्व से प्रेरणा ले। ब्रह्मचारी वेदव्रत ने कहा कि आचार्य अभय देव ने ब्रह्मचर्य और गुरुकुल पद्धति की विशिष्टता को अपने आदर्श जीवन से गरिमा प्रदान की। आर्य समाज के प्रधान आनंद पाल सिंह आर्य, मंगत सिंह आर्य, वीरेंद्र सिंह आर्य, आरके माथुर, इंजीनियर रणवीर सिंह, तपेंद्र कुमार आर्य, राकेश कुमार आर्य ने विचार रखे। मौके पर वेदपाल सिंह, यशपाल सिंह, डॉ जीत सिंह तोमर, योगाचार्य सुरेंद्रपाल सिंह आर्य, योगेश्वर दयाल आर्य आदि मौजूद रहे। अध्यक्षता स्वामी योगानंद एवं संचालन आरपी शर्मा ने किया।
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