बुढ़ाना। वेद की ज्योति जलती रहे, ओम का झंडा ऊंचा रहे के उद्घोष के साथ आर्य समाज के वार्षिकोत्सव का रविवार को समापन हो गया। वैदिक मर्मज्ञ सुलभा शास्त्री ने कहा कि महर्षि दयानंद ने नारी सम्मान को देश में नई चेतना जागृत की।
दयानंद नगर स्थित आर्य समाज में आयोजित वार्षिकोत्सव में वैदिक मर्मज्ञ सुलभा आर्य ने कहा कि ऋषि दयानंद ने माता को प्रथम गुरु बताया है। सती प्रथा को बंद कराकर उन्होंने नारी को सम्मानित जीवन का हक दिया। आचार्य गुरुदत्त आर्य ने कहा कि संस्कृति बचाने को माता-पिता सदाचरण को अपनाए। बच्चों को सत्य, ईमानदारी, आज्ञापालन, चरित्र, सेवा और देशभक्ति के सद्गुणों से युक्त करें। परिवार में यज्ञ प्रतिदिन होंगे तो भावी पीढ़ी भी संस्कारित बनेगी। वेदों में माता निर्माता भवति कहा गया है यानी संतान के व्यक्तित्व निर्माण में मां की अहम भूमिका है। मोहित शास्त्री ने कहा कि वैदिक संस्कृति जीवन का मूल आधार है।
महर्षि दयानंद की प्रेरणा से शहीद भगत सिंह, राम प्रसाद बिस्मिल, लाला लाजपत राय, स्वामी श्रद्धानंद, सुखदेव जैसे क्रांतिकारियों ने स्वतंत्रता संग्राम में प्राणों की आहुति दी। समारोह में आर्य समाज की ओर से जरूरतमंदों को कंबल वितरित किए गए। मौके पर आचार्य गुरुदत्त आर्य ने स्वामी यज्ञमुनि को अंगवस्त्र और सम्मान राशि भेंट की। ऋषिपाल वर्मा, तेजपाल सहरावत, मदन राठी, ओमपाल आर्य, संजीव आर्य, प्रसन्न चौधरी, अरविंद आर्य, शीशपाल आर्य, अतर सिंह शास्त्री, राज सिंह आर्य, शिवकुमार आर्य आदि मौजूद रहे। संचालन भूपति आर्य ने किया। यज्ञमान सुखपाल आर्य रहे।
सम्मानित हुई वैदिक विभूतियां
बुढ़ाना। वैदिक संस्कृति के प्रचारार्थ एवं समाज सुधार कार्यों के लिए स्वामी यज्ञमुनि लुहारी, आचार्य गुरुदत्त आर्य, ठेकेदार वीरेंद्र सिंह राणा, बालक राम आर्य बड़ौदा का आर्य समाज दयानंद नगर की ओर से अभिनंदन किया गया। शाल ओढ़ाकर स्मृति चिह्न, वैदिक साहित्य भेंट किया गया।