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ट्रिपल तलाक पर राय जुदा-जुदा

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तीन तलाक पर राय जुदा-जुदा
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मुजफ्फरनगर। तीन तलाक पर लाए गए अध्यादेश पर सबकी अलग-अलग राय है। भाजपा ने इसे मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों की जीत बताया है, वहीं विपक्ष ने इसे 2019 के चुनाव से पहले का स्टंट और अपने वोटर को खुश करने का तरीका बताया है। तीन तलाक के लिए लंबे अरसे से लड़ रही सामाजिक कार्यकर्ता रेहाना अदीब ने भी सवाल उठाए हैं।
इस मसले पर भाजपा सांसद डॉ संजीव बालियान का कहना है कि भाजपा लंबे समय से मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों की लड़ाई लड़ रही है। शोषण की शिकार मुस्लिम महिलाओं को इस अध्यादेश के आने के बाद न्याय मिलेगा। इस अध्यादेश से मुस्लिम महिलाओं का उत्पीड़न रुकेगा और वह मजबूती से अपनी कानूनी लड़ाई लड़ पाएगी। सपा के वरिष्ठ नेता और राज्य अल्पसंख्यक आयोग के पूर्व सदस्य मुफ्ती जुल्फिकार का कहना है कि तीन तलाक को लेकर पहले ही कानून बन चुका है, जो काफी है। भाजपा यह अध्यादेश 2019 के चुनाव को देखते हुए लाई है। मुस्लिम औरतों को इस कानून से कोई लाभ होने वाला नहीं है। भाजपा तो केवल अपने वोटरों को संदेश देना चाहती है। कांग्रेस के जिलाध्यक्ष मोहम्मद तारिक का कहना है कि बीजेपी को केवल मुस्लिम महिलाएं दिख रही हैं, हिंदू महिलाओं की चिंता भी कर ले। शादी करके छोड़ने की सबसे बड़ी समस्या हिंदू समाज में है। भाजपा को इन महिलाओं के बारे में भी सोचना चाहिए।
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सामाजिक संस्था अस्तित्व की अध्यक्ष रेहाना अदीब का कहना है कि केंद्र सरकार तीन तलाक को लेकर जो अध्यादेश लाई है, इसमें कुछ कमियां हैं, हम लंबे समय से तीन तलाक को लेकर लड़ाई लड़ रहे हैं, लेकिन हमारा उद्देश्य किसी का घर तोड़ना नहीं है। अध्यादेश के हिसाब से सीधे मुकदमा कर जेल भेजने का प्रावधान है। ऐसे में तलाक पीड़िता के बच्चों का खर्च कौन देगा। ऐसे में इसका दुरुपयोग नहीं होगा यह कैसे कहा जा सकता है। हालांकि अभी अध्यादेश आया है, कानून नहीं बना है, इसमें समय लगेगा।
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