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इमाम हुसैन के रास्ते पर चलकर मिटेगा आतंकवाद

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इमाम हुसैन के रास्ते पर चलकर मिटेगा आतंकवाद
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ॅअमर उजाला ब्यूरो
मुजफ्फरनगर। मुहर्रम के दूसरे दिने इमामबाड़ों में मजलिसें की गई। हजरत इमाम हुसैन की याद में बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक शिया समाज सोगवार हो गया है। मजलिसों में हजरत इमाम और कर्बला के वाकया पढ़े गए, जिन्हें सुनकर सोगवारों की आंखों से आंसू निकल पड़े। मौलाना ने खिताब फरमाया कि हजरत इमाम हुसैन ने पूरी इंसानियत के लिए कुर्बानी दी थी। उनके बताए रास्तों पर चलकर ही आतंकवाद से निजात पाई जा सकती है।
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भगत सिंह रोड स्थित पीरवाला नियाज अली इमाम बारगाह में मजलिस को खिताब फरमाते हुए नदीम जाफर जैदी ने कहा कि हजरत इमाम हुसैन ने इंसानियत को बचाने के लिए अपनी और अपने पूरे खानदान की कुर्बानी दी। उन्होंने बताया कि वक्त का यजीद कितना भी बड़ा खूंखार क्यों न हो, उसके सामने कभी सिर नहीं झुकाना चाहिए। उन्होंने फरमाया कि आज के दौर में भी दुनिया आतंकवाद जैसे नासूर जख्म से जूझ रही है, जिसके खात्मे के लिए हजरत इमाम साहब के बताए रास्तों पर चलना पड़ेगा, तभी आतंकवाद से निजात मिल सकती है। मजलिस में हसन रजा, शाहदाब, बाबर अली, अजहर अली आदि मौजूद रहे। उधर, करेहड़ा सैय्यदान में मजलिस की गई, जिसमें मौलाना ने खिताब फरमाया कि कर्बला में हजरत इमाम हुसैन और छह माह के अली असगर की कुर्बानी देकर दीन-ए-इस्लाम और इंसानियत की हिफाजत की। इस दौरान कर्बला के 72 शहीदों की याद में सोगवार जार-जार रोए। घरों में मजलिसों में महिलाओं ने भी हजरत इमाम हुसैन और उनके परिवार को याद किया।
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