मोरना। शुकतीर्थ के हनुमतधाम में आयोजित शुक रामायण कथा के प्रसंग को सुनाते हुए श्री चित्रकूट तुलसी पीठाधीश्वर जगदगुरु स्वामी रामभद्राचार्य ने कहा कि विद्वान व्यक्ति दिन प्रतिदिन जवान होता है। विद्वान कभी बूढ़ा नहीं होता। इस संसार में मनुष्य का वही जन्म, कर्म, आयु, मन और वाणी सफल है, सार्थक है जिसके द्वारा विश्वात्मा श्रीराम का भजन, ध्यान और चिंतन किया जाए तभी मुक्ति मिलेगी। भगवान श्रीराम के चरणों में रहकर सेवा भाव से हनुमान ने भक्ति का आत्मज्ञान प्राप्त किया।
पीठाधीश्वर ने कहा कि हनुमान ने भगवान श्रीराम के चरणों में बैठकर कहा कि मुझे ना तो ब्रह्मा का वरण चाहिए, मुझे तो श्रीराम के चरण चाहिए। ना ही विष्णु लोक, स्वर्ग, आदि का मोह है। बस आपकी सेवा का वरदान मेरे जीवन को सफल कर देगा। जिस प्रकार से वृक्ष की जड़ में जल देने से उसके तने, शाखा, उप शाखा, पत्र, पुष्प सब हरे भरे रहते हैं और जिस प्रकार भोजन द्वारा प्राणों का तृप्त कर देने से समस्त इंद्रियां पुष्ट रहती है और अपना काम करती हैं। उसी प्रकार भगवान श्रीराम के चरणों में रहने से सारे ब्रह्मांड की पूजा हो जाती है। इससे पूर्व कथा के मुख्य यज्ञमान सुशील अग्रवाल परिवार ने कथा के शुभारंभ पर वैदिक मंत्रोचारण कर विकलांग विश्वविद्यालय चित्रकूट के जीवन पर्यात कुलपति राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित जगद्गुरु रामभद्राचार्य महाराज को तिलक, माल्यापर्ण कर आशीर्वाद प्राप्त किया। मौके पर युवराज जयमिका, उज्ज्वल शांडिल्य, आचार्य द्विवेदी आदि ने शुभारंभ कार्यक्रम को संपन्न कराया। वहीं हनुमतधाम के अधिष्ठता महामंडलेश्वर स्वामी केशवानंद महाराज के सान्निध्य में आनंद ब्रह्मचारी, जितेंद्र वर्मा, राजीव, सुभाष आदि व्यवस्था में लगे हुए हैं। कथा को सुनने के लिए दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, पंजाब और अयोध्या से पधारे श्रद्धालु कथा का श्रवण कर धर्म लाभ उठा रहे हैं।