मुजफ्फरनगर। ट्यूबरक्लोसिस बैक्टरिया (टीबी) को जड़ से मिटाने के लिए अब प्राइवेट चिकित्सकों का भी सहारा लिया जाएगा। निजी चिकित्सकों, लैबों पर टीबी की जांच कराने वालों का रिकार्ड विभाग को देना होगा। ताकि स्वास्थ्य विभाग उस रोगी की काउंसिलिंग कराकर उपचार शुरु करा सके। इसके लिए विभाग ने शहर और देहात के सभी निजी चिकित्सकों को इस बाबत दिशा-निर्देश दिए हैं।
टीबी रोग की रोकथाम के मामले में जिले की हालत अच्छी नहीं है। सरकारी रिकार्ड में करीब 4600 से अधिक लोगों में टीबी के लक्षण है। इनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं। जबकि निजी चिकित्सकों, लैबों पर भी अधिकांश लोग जांच कराते हैं। जिनकी विभाग के पास जानकारी नहीं होती है। इसके चलते टीबी का रोग मिटाने में बाधा उत्पन्न हो रही है। अब विभाग ने निजी चिकित्सकों और लैबों पर होनी वाली टीबी जांच का रिकार्ड मांगा है। यह रिकार्ड इसलिए भी जुटाया जाएगा, कि कहीं निजी चिकित्सक, लैब संचालक अपने लाभ के लिए रोगियों को गुमराह तो नहीं कर रहे हैं। इन रोगियों के सैंपल की सीबीनॉट मशीन पर दोबारा जांच होगी। सैंपल पॉजीटिव होने पर रोगी में टीबी मानी जाएगी। सीएमओ डॉ पीएस मिश्रा ने बताया कि प्राइवेट चिकित्सकों, लैबों से भी रोगियों का रिकार्ड मांगा गया है। प्रतिदिन होने वाली टीबी की जांच का ब्योरा चिकित्सक विभाग में जमा कराएंगे।