मुजफ्फरनगर। सहारनपुर-हरिद्वार मार्ग पर डग्गामार वाहनों की जांच के लिए निकले अफसर खाली हाथ लौट आए। कार्रवाई के लिए केवल वाहन पकड़े गए। जिन पर जुर्माना लगाया गया। इसके अलावा मार्ग पर कहीं भी डग्गामार वाहन नहीं मिल सके हैं। अधिकारियों की यह कार्रवाई लोगों के गले से नीचे नहीं उतर रही है।
परिवहन निगम के अधिकारियों ने जनपदभर के कई रूटों पर डग्गामार वाहनों का सर्वे कराया था। जिसमें सहारनपुर, देवबंद, हरिद्वार, पुरकाजी के साथ रुड़की मार्ग पर सबसे अधिक डग्गामार वाहनों की कतार मिली थी। यहां पर करीब 200 से अधिक ऐसे वाहन मिले थे, जो डग्गामारी में शामिल है। जिनमें कार, जीप, टाटा मैक्स, पिकअप, साधारण और लग्जरी बस तक पाई गई थी। इसकी सूची बनाकर परिवहन ने एआरटीओ कार्यालय को सौंप दी, लेकिन कार्रवाई के नाम पर हाल वही ढाक के तीन पात जैसा है। सोमवार को सहारनपुर-रुड़की, हरिद्वार मार्ग पर दौड़ने वाले डग्गामार वाहनों को पकड़ने के लिए जिला अस्पताल पर जांच की गई। एआरएम-एआरटीओ की संयुक्त जांच में मार्ग पर केवल तीन वाहन पकड़ में आए। अब सवाल है कि अधिकारियों के आने की भनक डग्गामार वाहन चालकों को पहले से ही दी गई थी। उधर, एआरएम बीपी अग्रवाल ने बताया कि अस्पताल चौराहे पर डिपो की दस बस लगी हैं, लेकिन डग्गामार चालकों की मनमानी के आगे निगम के कर्मचारी परेशान है। कई बार बस चालकों के साथ हाथापाई तक हो चुकी है। सोमवार को तीन वाहन मिले हैं, आगे भी कार्रवाई होगी।