एक माह बाद भी 10 की स्पीड से गुजर रही ट्रेनें
मुजफ्फरनगर/खतौली। रेलवे महकमे के लिए 19 अगस्त की तारीख काले अध्याय में दर्ज हो गई। खतौली में इसी तारीख को पुरी-हरिद्वार कलिंग उत्कल एक्सप्रेस हादसे का शिकार बनी थी। शब्दों की जुबानी में भले ही इसे हादसा कह दें, मगर यह सिस्टम का सामूहिक कत्ल है, जिसमें 26 यात्रियों का सफर अंतिम साबित हुआ, जबकि दर्जनों आज भी जिंदगी और मौत से जूझ रहे हैं। हादसे के बाद से बिगड़ा रेलवे का संतुलन एक माह बाद भी पटरी पर नहीं लौट सका है।
दिल्ली-टपरी वाया मेरठ मंडल की रेलवे लाइन पर 19 अगस्त को उत्कल एक्सप्रेस ट्रेन हादसे का शिकार हुई थी। खतौली के किलोमीटर 101/03-04 पर एक माह बाद भी ट्रेनों का संचालन ठीक से पटरी पर नहीं है। यहां 10 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार ट्रेनों का संचालन बदस्तूर जारी है। रेलवे बोर्ड ने विशेष पटरियों को लेकर ट्रैक का कार्य शुरू करा दिया है। पहले राउंड में रेलवे बोर्ड ने एक किलोमीटर ही ट्रैक का टुकड़ा बदलने का काम प्रारंभ कराया गया है। ट्रैक और स्लीपर के साथ नट-बोल्ट बदलने के लिए रेलवे के इंजीनियर रोजाना दोपहर को ब्लॉक लेकर कार्य कर रहे हैं। इससे ट्रेनों का संचालन बिगड़ गया है। दिल्ली-टपरी रेलवे लाइन की एक्सप्रेस, सुपरफास्ट से लेकर पैसेंजर तक प्रभावित हो रही हैं। ब्लॉक के कारण अंबाला और दिल्ली पैसेंजर ट्रेन पूरी तरह से प्रभावित रहती हैं। ट्रेनों को कॉशन देकर निकाला जा रहा है। उधर, आम जनता से लेकर रेलवे भी इस भयावह हादसे को नहीं भुला सकेगा। वक्त के साथ तस्वीर भले ही धुंधली होती जाएं, लेकिन हादसे में जिन घरों के चिराग बुझे हैं, उनकी भरपाई कर पाना नामुमकिन है। उत्कल हादसे के दर्जनभर घायल लोग अलग-अलग अस्पतालों में उपचाराधीन हैं।
स्टेशन मास्टर के भी दर्ज हुए बयान
मुजफ्फरनगर। उत्कल हादसे की जांच-पड़ताल जीआरसी सीओ गाजियाबाद रणधीर सिंह कर रहे हैं। प्रथमदृष्टया मामले में रेलवे अधिकारियों और कर्मचारियों की लापरवाही सामने आई है। हादसे की एसआई अजय कुमार की ओर से अज्ञात में रिपोर्ट दर्ज है। हालांकि प्रकरण में जीआरपी ने भी जांच तेज कर दी है। हादसे में खतौली में ट्रैक पर कार्य करने वाले कर्मचारियों के साथ स्टेशन मास्टर राजेंद्र सिंह के भी बयान दर्ज किए गए हैं।
मलबा नहीं हट सका, सुरक्षा में लगे कर्मी
मुजफ्फरनगर। उत्कल एक्सप्रेस के डिरेलमेंट होने के कारण ट्रेन के 13 डिब्बे पटरी से उतरे थे। जिनमें पांच डिब्बे बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गए थे। 24 घंटे तक चले बचाव ऑपरेशन के बाद ट्रैक पर पड़े डिब्बे हटाए गए थे, जिन्हें पटरियों की साइड में डाला गया है। इनकी सुरक्षा में आरपीएफ के जवान तैनात हैं। अधिकांश मलबे को हटवा कर मेरठ कैंट और सिटी स्टेशन पर रखवाया गया है।