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चारों शवों के घर पहुंचते ही परिवारों में कोहराम मचा

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एक परिवार से उठीं तीन अर्थियां
सड़क दुर्घटना में चार लोगों की हो गई थी मौत
एक महिला के शव का शुक्रताल में हुआ अंतिम संस्कार
फोटो समाचार
अमर उजाला ब्यूरो
खतौली (मुजफ्फरनगर)। मंसूरपुर नेशनल हाईवे पर सड़क हादसे में मरे दो महिलाओं सहित चारों के शव पोस्टमार्टम के बाद घर पहुंचे। शवों के घर पहुंचते ही परिवारों में कोहराम मच गया। एक महिला का शव पहले घर पहुंचा, जिसको परिवार के लोग अंतिम संस्कार के लिए शुक्रताल गंगाघाट पर ले गए। एक ही परिवार से तीन अर्थियां एक साथ उठने पर मौके पर मौजूद लोगों की आंखें नम हो गई थी। गमगीन माहौल में तीनों शवों का अंतिम संस्कार श्मशान घाट में कर दिया गया।
मोहल्ला देवीदास निवासी डॉ. अशोक शर्मा, पत्नी संतोष शर्मा, बेटा प्रवीण शर्मा, उसकी पत्नी अनीता व तीन बच्चे तथा मोहल्ले की रहने वाली महिला सविता गोयल अपने दो बेटी व एक बेटे के साथ मारुति वैन से सोमवार की सुबह हरिद्वार में गए थे। मारुति वैन को प्रवीण शर्मा चलाकर ले गया था। मंगलवार को दोनों परिवार के सदस्य हरिद्वार से लौट रहे थे। मंसूरपुर नेशनल हाईवे पर नरा जड़ौदा के पास सड़क किनारे खड़े ट्रक में मारुति वैन पीछे से जा घुसी थी। इस दौरान हादसे में वैन में सवार डॉ. अशोक शर्मा, उसकी पत्नी संतोष शर्मा, बेटे प्रवीण शर्मा व सविता गोयल की मौके पर ही मौत हो गई थी। हादसे में एक महिला व सात बच्चे घायल हो गए थे। बुधवार को गोयल परिवार के लोग दोपहर को पहले सविता गोयल के शव का पोस्टमार्टम कराकर घर लेकर पहुंचे। महिला का शव घर पहुंचते ही परिवार में कोहराम मच गया। परिवार के लोग शव का अंतिम संस्कार करने के लिए शुक्रताल ले गए। करीब दो घंटे के बाद कुटुंब परिवार के लोग पोस्टमार्टम कराकर दंपति व बेटे का शव लेकर घर पहुंचे। शवों के घर पहुंचते ही परिवार की महिलाओं में कोहराम मच गया। परिवार और रिश्तेदारी से आई महिलाए शवों को लिपट लिपट रोने बिलखने लगी। एक साथ तीन अर्थियों के उठने से मौके पर मौजूद लोगों की आंखें नम हो गई थी। गमगीन माहौल में तीनों शवों का श्मशान घाट पर अंतिम संस्कार कर दिया गया।
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मुस्लिमों ने भी अर्थियों को दिया कंधा
मोहल्ला देवीदास में हिंदू और मुस्लिम की मिश्रित आबादी है। दोनों परिवारों में जिस वक्त शव पहुंचे। उस वक्त मोहल्ले की काफी संख्या में मुस्लिम महिलाएं और पुरुष मौजूद रहे। मुस्लिम महिलाओं ने परिवारों में रोती बिलखती महिलाओं को ढांढस बंधाया। मुस्लिम समाज के लोगों ने अर्थियों को तैयार करने में सहयोग दिया। इतना ही नहीं मुस्लिम समाज के लोगों ने चारों अर्थियों को कंधा भी दिया और श्मशान घाट तक अंतिम यात्रा में शामिल हुए। श्मशान घाट पर अंतिम संस्कार के दौरान भी काफी संख्या में मुस्लिम समाज के लोग मौजूद रहे।
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दूसरे दिन भी बाजार बंद
सड़क हादसे की मंगलवार को जैसे ही लोगों को जानकारी मिली थी। उसी समय हिंदू व मुस्लिम दुकानदारों ने अपनी अपनी दुकानें बंद कर दी थी। कुछ मुस्लिम दुकानदार तो अपने वाहनों से मुजफ्फरनगर जिला अस्पताल भी पहुंचे थे। बुधवार को भी दुकानदारों ने पूर्णत: बाजार बंद रखा और शोकाकुल परिवार के साथ मौजूद रहे।
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