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डीएम ने खिंचाई की तो जागा स्वास्थ्य विभाग

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मुजफ्फरनगर। डीएम के खिंचाई करने पर स्वास्थ्य विभाग की नींद खुल गई। आला अधिकारियों ने छह माह में अल्ट्रासाउंड केंद्रों पर मारे गए छापे और कार्रवाई का रिकार्ड खंगाला है। इतना ही नहीं अल्ट्रासाउंड के लिए बनाई गई कमेटी के पदाधिकारियों और सदस्यों की भूमिका की जांच भी शुरू कर दी है।
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जिले में लंबे समय से अल्ट्रासाउंड केंद्रों पर लिंग परीक्षण की शिकायतें सामने आती रही हैं। स्वास्थ्य विभाग मामले में ढिलाई बरत रहा है। बृहस्पतिवार को डीएम ने जिले के कई विभागों की मीटिंग ली थी। मीटिंग में स्वास्थ्य विभाग के पीसीपीएएनडीटी एक्ट (पूर्व गर्भाधान और प्रसव पूर्ण निदान तकनीक अधिनियम) को लेकर डीएम ने खासी नाराजगी जाहिर की। सीएमओ से भरी मीटिंग में अल्ट्रासाउंड केंद्रों पर जांच और कार्रवाई के बारे में जानकारी तो वे कोई जवाब नहीं दे सके थे। इस पर डीएम ने कड़ी फटकार लगाते हुए अब तक की गई कार्रवाई का ब्यौरा तलब किया था। प्रशासन की इस खिंचाई के बाद स्वास्थ्य विभाग की नींद टूट गई है। गत वर्ष से लेकर अब तक अल्ट्रासाउंड केंद्रों की जांच के लिए बनी कमेटी के छापेमारी, कार्रवाई और किस केस में क्या कार्रवाई रही है? इसकी जानकारी खंगाली जा रही है। इसके साथ कमेटी में पदाधिकारी और सदस्यों की भूमिका भी जांच हो रही है। कमेटी में शहर के कई नामचीन चिकित्सक सदस्य के रूप में पंजीकृत है।
सीएमओ डॉ. पीएस मिश्रा ने बताया कि अल्ट्रासाउंड केंद्रों पर टीम सीधे छापेमारी नहीं कर सकती है। इसके लिए उच्चाधिकारियों की अनुमति चाहिए, फिर भी जिले में गोपनीय रूप से टीम लगाकर जांच पड़ताल शुरू कराई गई है ताकि स्थिति साफ हो सके। लिंग परीक्षण करने वाले चिकित्सक, नर्सिंग होम का लाइसेंस निरस्त करने के साथ ही एफआईआर दर्ज कराई जाएगी।
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