16 किलोमीटर मार्ग, 15 गांव, यातायात का कोई साधन नहीं
खतौली। आधुनिक युग में जहां गांव-गांव तक सड़क और यातायात के साधन उपलब्ध हैं, वहीं खतौली क्षेत्र के कुछ गांव ऐसे भी हैं, जहां पर रहने वाले लोग यातायात के साधनों को तरस रहे हैं। बच्चों को स्कूल आने जाने के लिए भी पैदल चलना पड़ता है।
खतौली से फहीमपुर, पीपलेहड़ा होकर यह लगभग 16 किलोमीटर लंबा मार्ग फलावदा तक जाता है। इस मार्ग पर पिछले पांच सालों से आने जाने के लिए यातायात की सुविधा नहीं है। इस मार्ग पर पड़ने वाले एक दर्जन गांवों के लोग अपने निजी वाहनों या पैदल चलकर आने जाने को मजबूर हैं। कुछ समय से ई-रिक्शा आने लगीं, लेकिन यदि ई-रिक्शा चार्ज नहीं होती तो अधिक परेशानी होती है। ग्रामीणों का कहना है कि ई-रिक्शा चालक मनमाना किराया वसूलते हैं। ग्रामीणों ने इस मार्ग पर भी रोडवेज बस चलाने के लिए कई बार मांग की है। इस मार्ग पर खतौली से लोग अतरपुरा, शाहपुर, पीपलेहड़ा, सिखेरड़ा, मौचड़ी, चंदपुरी, चांदसमद, फहीमपुर, जसौला, नंगली, कढली, सिकंदरपुर, मंदवाड़ी होकर फलावदा जाते हैं।
क्या कहत हैं ग्रामीण
सिखरेड़ा गांव के किसान सुभाष शर्मा का कहना है कि गांव आने जाने के लिए कोई साधन नहीं है। दस साल पहले रोडवेज की दो बसें चलती थीं। पांच साल पहले प्राइवेट बसों का संचालन भी इस रूट पर बंद कर दिया गया था। जसौला निवासी सतीश कुमार का कहना है कि वह मजदूरी करने के लिए खतौली जाते हैं। साधन न होने के कारण उसे साइकिल से ही जाना पड़ता है। मौचड़ी निवासी नरेश कुमार का कहना है कि इस मार्ग को लेकर उदासीनता बरती जा रही है। चांद समद निवासी सहेंद्र पाल का कहना है कि कुछ गांव के लोग ई-रिक्शा चलाने का काम कर रहे हैं। बिजली सही से नहीं आती तो ई-रिक्शा भी चार्ज नहीं हो पाती। शाहपुर निवासी प्रमोद कुमार का कहना है कि इस मार्ग पर एक दर्जन से अधिक गांव स्थित है। बावजूद इसके यातायात का कोई साधन नहीं है।
इस कारण से बसे की गई बंद
बस संचालक मुकेश कुमार ने बताया कि इस मार्ग पर कम ही निजी बसें चलती थीं, लेकिन यात्री होने के बाद भी किराया नहीं मिल पाता था, युवा अभद्रता करते थे। गाड़ी चलने का समय निर्धारित है, कम सवारियां हंगामा करने लगती थीं। इसके अलावा एनसीआर में जनपद आने से बसों की फिटनेस समाप्त हो जाने के बाद बसें चलनी बंद हो गईं। मालिकों ने नई बसें नहीं बर्नाइं। जिस कारण परमिट भी निरस्त हो गए।
अभी इस तरह की कोई शिकायत नहीं मिली है। यदि कोई मामला सामने आता है तो एआरएम रोडवेज से वार्ता की जाएगी। ग्रामीणों की समस्या का समाधान कराया जाएगा
- जीत सिंह राय, एसडीएम खतौली
खतौली से सतीश जसौला- फोटो : MUZAFFARNAGAR
खतौली से नरेश मौचडी- फोटो : MUZAFFARNAGAR
खतौली से सहेंद्र पाल चांदसमद- फोटो : MUZAFFARNAGAR
खतौली से प्रमोद कुमार शाहपुर- फोटो : MUZAFFARNAGAR
खतौली से जसौला ईरिक्शा में जाते हुए यात्री- फोटो : MUZAFFARNAGAR
खतौली से गांव जाने के लिए ई-रिक्शा की प्रतीक्षा करते हुए यात्री।- फोटो : MUZAFFARNAGAR