रानी लक्ष्मीबाई की वीरता राष्ट्र का गौरव: गुरुदत्त
मुजफ्फरनगर। स्वतंत्रता संग्राम की शहीद वीरांगना झांसी की रानी लक्ष्मीबाई के बलिदान दिवस पर उनकी वीरता और देशभक्ति का भावपूर्ण स्मरण किया गया। आचार्य गुरुदत्त आर्य ने कहा कि लक्ष्मीबाई का चरित्र राष्ट्र का गौरव है। आजादी की लड़ाई में देश की नारियों ने प्राणों की आहुति दी थी।
दयानंद मार्ग स्थित आर्य समाज नई मंडी में वीरांगना रानी लक्ष्मी बाई के बलिदान दिवस पर यज्ञ में आहुतियां अर्पित कर श्रद्धांजलि दी गई। वैदिक संस्कार चेतना अभियान संयोजक आचार्य गुरुदत्त आर्य ने कहा कि लक्ष्मीबाई ने शास्त्रों के साथ शास्त्र की भी शिक्षा ली। उनकी विद्वत्ता, चरित्र, धर्म पालन, देशभक्ति, कर्तव्यनिष्ठा अतुलनीय है। 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में अंग्रेजों के खिलाफ युद्ध मे उन्होंने वीरगति प्राप्त की। उनका जीवन भारतीय संस्कृति की मर्यादा का प्रतीक है। राष्ट्रीय भावना से बढ़कर कोई धर्म नही है। आर्य समाज प्रधान आनंद पाल सिंह आर्य ने कहा कि लक्ष्मीबाई का व्यक्तित्व देश की युवा पीढ़ी को देशप्रेम की ऊर्जा देता है। मातृभूमि की रक्षा और सेवा का कर्तव्य निभाए। सतीश आर्य ने प्रेरक भजन सुनाया। आरपी शर्मा, मंगत सिंह ने विचार रखे। आमोद आर्य, राजपाल आर्य, सुमन आर्य, वीरेंद्र आर्य, मंजू आर्य, प्रियंका आर्य आदि मौजूद रही। उधर, गांधी कालोनी आर्य समाज में देव यज्ञ के बाद अमर बलिदानी रानी लक्ष्मीबाई को नमन किया गया। संयोजक इंद्र पाल सिंह और गजेंद्र सिंह राणा के निर्देशन में वक्ताओं ने स्वतंत्रता संग्राम में लक्ष्मीबाई के संघर्ष और त्याग के प्रसंग प्रस्तुत किए। राम सिंह धीमान, संगीत राठी, आचार्य दयाचंद, जवाहर लाल अरोरा, दिनेश ढींगड़ा, नरेंद्र मलिक, उषा पटपटिया , नन्दिनी आर्य, कांता धीमान, सोमवती आदि ने श्रद्धांजलि दी। संचालन गजेंद्र राणा ने किया।