देवबंद। 12 सितंबर वर्ष 2009 क्षेत्र के दर्जनों परिवारों के लिए आज भी मनहूस है। क्योंकि इसी दिन जहरीली शराब का जाम पीकर उनके अपने उन्हें रोता बिलखता हुआ छोड़कर चले गए थे। जब कभी भी शराब से किसी की मौत होती है तो आज भी उनके जख्म हरे हो जाते हैं और आंखों से आंसू छलक उठती हैं।
देवबंद क्षेत्र में कच्ची शराब ने मौत का जो तांडव मचाया था वो आज भी लोगों को याद है। जिन्होंने अपनों को खोया वो उन्हें याद कर आज भी सिहर उठते हैं। वर्ष 2009 की 10 सितंबर की रात से शुरू हुआ मौतों का सिलसिला 12 सितंबर तक जारी रहा। जहरीली शराब का जाम पीने से खजूरी गांव में 9, जड़ौदा जट्ट में 2, नन्हेड़ा आसा में 3, लबकरी में 3, भायला में 1, घलौली में 4, रणखंडी में 4, देवबंद में 9 और लखनौती गांव में 1 की मौत हो गई थी। 36 मौतें होने के बाद चारों तरफ मातम पसरा हुआ था। इस शराबकांड के बाद पुलिस और आबकारी विभाग ने बड़े पैमाने पर शराब माफियाओं के विरुद्ध अभियान चलाया तो लाखों लीटर कच्ची शराब व लेहन बरामद होने के साथ ही सैकड़ों लोगों की गिरफ्तारियां हुईं थीं। पुलिस की कार्रवाई को देखकर लग रहा था कि अब इस धंधे पर पूर्णतया प्रतिबंध लग जाएगा। लेकिन ऐसा हुआ नहीं। लोगों की गिरफ्तारियां और कुछ पुलिस अधिकारियों पर गाज गिरने के बाद फिर से यह मामला ठंडे बस्ते में चला गया। उसके बाद से लगातार क्षेत्र में शराब का धंधा जोर पकड़ता चला गया। आलम यह हो गया कि पुरुषों के स्थान पर महिलाओं ने इस धंधे की कमान संभाल ली और धीरे धीरे कारोबार बढ़ने लगा तो शराब माफियाओं ने जंगलों को भट्टियां सुलगाने का ठिकाना बना लिया। मंगलवार की पुलिस की दबिश में महिलाओं का पकड़े जाने से यह साबित होता है कि अब महिलाएं ही बड़े पैमाने पर इस धंधे से जुड़ी हैं।