अदालत ने केस को विरल से विरलतम नहीं माना
मुजफ्फरनगर। अदालत ने रिया हत्याकांड को विरल से विरलतम श्रेणी का केस नहीं माना। हालांकि अभियोजन पक्ष ने इस मुकदमे को इसी श्रेणी का बताते हुए दोषी ठहराए गए गुनहगारों को मृत्युदंड दिए जाने की मांग अदालत से की। कोर्ट ने अपने 40 पेज के निर्णय में केस को इस श्रेणी का नहीं मानते हुए तीनों दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई।
एडीजे प्रथम वीर नायक सिंह की अदालत में बृहस्पतिवार दोपहर सवा बारह बजे तीनों दोषियों की सजा के प्रश्न पर सुनवाई हुई। सीबीआई के लोक अभियोजन अधिकारी दर्शन सिंह और अभियोजन की ओर से एडीजीसी जितेंद्र त्यागी, आशीष त्यागी एवं वादी के अधिवक्ता सत्येंद्र कुमार सिंह ने इस केस को विरल से विरलतम श्रेणी का बताते हुए तीनों दोषियों को मृत्युदंड देने की मांग की। कहा कि रिया होनहार छात्रा थी, हाईस्कूल में भी वह टॉपर रही, उसने पिता की जान बचाते हुए अपनी जान दी, जिस पर बचाव पक्ष ने अदालत से कम से कम सजा की मांग की। बचाव पक्ष ने कहा कि दोषी ठहराए गए तीनों आपस में सगे भाई हैं, जो खेती किसानी करते हैं। सजा के प्रश्न पर दोनों पक्षों को सुनते हुए कोर्ट ने इस केस को विरल से विरलतम श्रेणी का नहीं माना। अदालत ने तीनों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
मां की हालत बिगड़ी, कहा निर्दोष हैं बेटे
मुजफ्फरनगर। बृहस्पतिवार को कोर्ट में सजा पर सुनवाई के दौरान रोहताश, सुनील, ललित के परिजन भी कोर्ट के बाहर थे। उन्हें कोर्ट के फैसले का इंतजार था। कोर्ट का फैसला आने पर उनकी मां राजवीरी की हालत अचानक बिगड़ गई। कहा कि बेटे निर्दोष हैं। परिजन उसे वहां से ले गए। साथ में आए परिजनों से जब अदालत के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील करने की बात पूछी गई, तो उन्होंने इस पर कुछ भी कहने से इंकार कर दिया। सजा सुनाए जाने पर तीनों भाइयों के चेहरे पर उदासी थी। कोर्ट के फैसले के बाद तीनों को कड़ी सुरक्षा में जेल ले जाया गया।