परंपरागत कोल्हू संस्कृति को वापस लाने के प्रयास
मुजफ्फरनगर। परंपरागत कोल्हू की संस्कृति को वापस लाने के लिए डीएम अजय शंकर पांडेय ने प्रयास शुरू कर दिए। बैल चालित कोल्हुओं को वापस लाने तथा इनमें बनने वाले गुड़ को ग्रीन गुड़ के नाम से बाजार में उतारने के लिए प्रस्ताव तैयार किया है।
एक जिला एक उत्पाद योजना के अंतर्गत जिले में तीन दिवसीय गुड़ महोत्सव का आठ से दस जून तक आयोजन हुआ है। इस कार्यक्रम के बाद डीएम अजय शंकर पांडेय ने परंपरागत कोल्हुओं को पुन:जीवित करने के लिए कार्ययोजना तैयार की है। उन्होंने गुड़ महोत्सव में अपना कांसेप्ट नोट भी प्रस्तुत किया। इसमें पशु श्रम शक्ति से संचालित होने वाले कोल्हुओं को प्रोत्साहित करने पर जोर दिया गया। पशु चालित कोल्हुओं से उत्पादित गुड़ को ‘ग्रीन गुड़’ के नाम से बाजार में लाने की भी बात कही। इससे जहां बिजली की खपत कम होगी, वहीं निराश्रित गोवंश की समस्या का भी समाधान हो सकता है। बिजली की जितनी बचत होगी, उसके मूल्य का कुछ प्रतिशत कोल्हू उत्पादकों को इंसेंटिव के रूप में दिया जाए। ‘ग्रीन गुड़’ मध्याह्न भोजन योजना, आंगनबाड़ी केंद्रों एवं अन्य सरकारी समारोहों में अनिवार्य रूप से प्रयोग में लाने की नीति निर्धारित की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि ग्रीन गुड़ बनाना है तो गन्ने की बुआई उसी प्रक्रिया से होनी चाहिए। बैल व हल से खेत की जुताई करके एवं गोबर आधारित तमाम जैविक खादों का इस्तेमाल करके गन्ने का उत्पादन किया जाए। किसान इस योजना का पालन करेगा तो ऐसे किसानों को बिजली, सिंचाई एवं पेस्टीसाइड आदि मुफ्त उपलब्ध कराई जाए। जो किसान इस योजना से जुड़ना चाहता है, उनसे सहमति ली जा रही है।