मोबाइल को अपने दिमाग के अंदर मत घुसने दो
मोरना। शुकतीर्थ स्थित शुकदेव आश्रम में कथा व्यास देवकी नंदन ठाकुर महाराज ने कहा कि जिनकी इंद्रिया वश में होती हैं। वह हर हालात में प्रसन्न रहते हैं। किसी का हक अगर मारोगे तो दरिद्रता झेलने को तैयार रहें। माता-पिता की जगह को कोई नहीं भर सकता, उनके जाने के बाद उनकी अहमियत समझ में आती है। मोबाइल को अपने दिमाग के अंदर मत घुसने दो। सेल्फ स्टडी आपको आगे लेकर जाएगी। स्कूल में फैशन शो के लिए नहीं, बल्कि विद्या प्राप्त करने के लिए जाएं।
उन्होंने कहा कि रिश्तेदारी, मित्रता अपने विचार वालों के साथ होती है। बुराइयों में वो जाते हैं, जो बुरा बनना चाहते हैं। नशा करने की लत छोड़ने का संकल्प कथा के दौरान लेना चाहिए, ताकि बुराई छोड़ने की शुरुआत भगवान के समक्ष हो जाए। विषय वासनाओं से दूर नहीं जाओगे तो तुम्हें भक्ति की प्राप्ति नहीं हो पाएगी। मानव का अपना आसन, श्वांस व संग को जितना होगा, तभी इंद्रियों पर नियंत्रण होगा। इंद्रियों के वश में होने पर भक्ति की स्वत: प्राप्ति हो जाएगी। संत का एक क्षण आपके जीवन को सुधार देगा। यह सनातन धर्म की मर्यादा है, धर्म के प्रति जागरूक रहो। आप मृत्यु को टाल नहीं सकते, इसका कोई तरीका नहीं है। व्यक्ति के जन्म से पहले मृत्यु का जन्म होता है, स्थान , समय और कारण तय होने से मृत्यु होगी। यह निश्चित है। ग्रह नक्षत्र खराब होने से आप पर झूठे इल्जाम लगते हैं, दोष लगना चाहिए, जिससे पाप नष्ट होते हैं। परोपकार पर झूठ लगे इसका मतलब कि भगवान तुम्हारे पापों को मिटाना चाहते हैं। जरूरत से ज्यादा माया रखना चोरी है, माया मानव को भागवत से दूर करती है। कथा प्रारंभ के दौरान गंगा सेवा समिति सचिव डा. महकार सिंह, अरुण गर्ग, पूर्व प्रधानाचार्य इंद्रपाल सिंह, प्रेम शंकर मिश्रा प्रधानाचार्य संस्कृत पाठशाला गुरुकुल, चौधरी सुरेंद्र सिंह आदि ने कथा व्यास को सम्मानित कर शुकतीर्थ में पधारने का धन्यवाद दिया। वहीं, कथा के आयोजन में शुकदेव आश्रम के हर्षमणी, अचल शास्त्री, सुमन शास्त्री, आशीष माधव शास्त्री, राजू शर्मा, अनिल, राजेंद्र, युवराज, ठाकुर, प्रदीप, शैलेश चौरसिया आदि व्यवस्था बनाने में लगे हुए हैं।