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सड़क पर लावारिस घूम रहे गोवंश

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सड़क पर लावारिस घूम रहे गोवंश
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बुढ़ाना। वर्तमान में किसानों के लिए गोवंश परेशानी बन गए हैं। पशु पालकों व किसानों को गोवंश पालने में घाटा हो रहा है। गोवंश की खरीद फरोख्त न होने के कारण पशु पालक उन्हें सड़कों पर लावारिस छोड़ रहे है। वहीं, गोवंश किसानों की फसलों को बर्बाद कर रहे है।
बुढ़ाना कस्बे व देहात क्षेत्र में काफी संख्या में गोवंश सड़कों व खेतों में लावारिस घूम रहे है। देहात में पारिवारिक बटवारे के कारण घर व घेर का आकर भी छोटा हो गया है। ऐसी हालत में खेती की जमीन व पशुओं के रख रखाव की जमीन कम होने के कारण किसान गोवंश को नहीं पालना चाहते। छोटे बछड़ों को देर रात के समय दूसरे गांव में छोड़ दिया जाता है। कस्बा व देहात में बेसहारा गोवंश की संख्या लगातार बढ़ रही है। हालांकि 27 मई को डीएम अजय शंकर पांडेय ने एसडीएम को इस समस्या का समाधान तत्काल प्रभाव से करवाने के निर्देश दिए थे। मगर अभी तक कोई समाधान नहीं हुआ है। सेवानिवृत्त अपर जिला कृषि अधिकारी रामनिवास सहरावत का कहना है कि विदेशी नश्ल की गाय व बछड़ों की बिक्री न होने के कारण किसान व पशुपालक उन्हें लावारिस छोड़ रहे है। लावारिस पशु किसानों की फसलों को बर्बाद कर रहे है। बिराल गांव के पूर्व प्रधान रणदीप सिंह उर्फ दीपक का कहना है कि आवारा पशु खेतों से बाहर निकाले जाने पर किसान पर हमला करते है। अब गोवंश भी किसान के सिर का दर्द बन गए है। फुुगाना के प्रधान जितेंद्र मलिक, किसान चरण सिंह, हाजी जमशैद, जगपाल सिंह आदि का कहना है कि इस समस्या का समाधान होना चाहिए।
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अस्थाई आश्रय स्थल बनेंगे
खंड विकास अधिकारी सुभाष चंद्र ने बताया कि लावारिस गोवंश के लिए पूरे ब्लॉक में अस्थाई आश्रय स्थल की व्यवस्था की जा रही है। फिहाल फतेहपुरखेड़ी व अटाली गांव में अस्थाई आश्रय स्थल का निर्माण करवाया जा रहा है। अन्य सभी गांवों में चरागाह की जमीन की तलाश की जा रही है। जमीन उपलब्ध होते ही ग्राम निधि से अस्थाई आश्रय स्थल का निर्माण करवाया जाएगा। इस कार्य में सभी ग्राम प्रधानों का सहयोग लिया जा रहा है।
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कस्बे में बनी कांहा गोशाला व बेसहारा पशु आश्रय शहरी क्षेत्र के लिए है। इस गोशाला की क्षमता करीब 150 पशुओं की है। वर्तमान में कस्बे की गोशाला में करीब 170 की संख्या में गोवंश है। - अधिशासी अधिकारी ओम गिरी।
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