मुजफ्फरनगर। प्रख्यात आर्टिस्ट और मिनर्वा कॉलेज ऑफ फाइन आर्ट देहरादून के प्राचार्य संतोष साहनी कला के क्षेत्र में कॅरियर की अपार संभावनाएं मानते हैं। उनका कहना है कि कला जहां अच्छा जीवन जीना सिखाती, वहीं रोजगार के मामले में भी इंजीनियरिंग और मेडिकल की तरह बेहतर विकल्प देती है। इसीलिए युवाओं का रुझान आर्ट की ओर बढ़ रहा है।
राज्य ललित कला अकादमी की ओर से राजकीय शैक्षणिक संग्रहालय में चल रही चित्रकला कार्यशाला में आए संतोष साहनी ने अमर उजाला से बातचीत की। उन्होंने कहा कि कला में कॅरियर को लेकर नकारात्मक भावना है, लेकिन सच्चाई यह है कि इसमें रोजगार की अपार संभावनाएं हैं। टीचिंग के साथ ही पब्लिकेशन, एलिवेशन कलरिंग (कहानी पर चित्रण करना), फ्रीलांस पेंटिंग, फिल्म एवं टीवी इंडस्ट्री में सेट डिजाइन, पंडाल डिजाइन, फैशन, एनिमेशन आदि क्षेत्रों में कॅरियर बनाया जा सकता है। युवाओं का रुझान कला में बढ़ा है। मेडिकल या इंजीनियरिंग कर आप किसी एक क्षेत्र में जा सकते हैं, लेकिन फाइन आर्ट कॅरियर के कई ऑप्शन देती है। एक आर्टिस्ट होने के नाते वह कह सकते हैं कि कला अच्छा जीवन जीने का एक माध्यम है। इससे जुड़कर कलाकार अपने दुख-दर्द भूल जाता है। वह अपने मन के भावों को पेंटिंग में प्रदर्शित कर सकता है। यह जीवन जीने की कला है।
बिना ब्रुश पेंटिंग बनाने के महारथी हैं साहनी
संतोष साहनी बिना ब्रुश के पेंटिंग बनाने के महारथी हैं। वह चारकोल और रबर की सहायता से आकर्षक चित्रकारी करते हैं। कहते हैं कि कला एक साधना है। निरंतर अभ्यास एक आर्टिस्ट को उस मुकाम पर पहुंचा देता है जहां उसे चित्रकारी के लिए बेसिक चीजों की जरूरत नहीं होती। वह बिना साधन भी अपनी कला का प्रदर्शन कर सकता है। 2016 में मेरठ में उन्होंने अन्य कलाकारों के साथ मिलकर सबसे लंबी पेंटिंग बनाई थी, जिसे गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड में दर्ज किया गया था। मूल रूप से मऊ के रहने वाले साहनी देश के लगभग सभी राज्यों में आर्ट पर आयोजित कार्यशालाओं में शिरकत कर चुके हैं।
छात्र-छात्राओं को सिखाई कला की बारीकियां
रविवार को राजकीय शैक्षणिक संग्रहालय में आयोजित कार्यशाला में संतोष साहनी ने छात्र-छात्राओं को चित्रकला की बारीकियां सिखाईं। इस मौके पर सह संयोजक प्रवीण सैनी, पीयूष शर्मा, प्रशिक्षक मयंक सैनी, रामकिशोर एवं छात्र-छात्राएं प्रांजल सैनी, विनीत, अनमोल, आर्यन, निशु शर्मा, प्रिंसी ठाकुर, शगुफ्ता एवं माहेनूर आदि मौजूद रहे। कार्यशाला का समापन 20 जून को होगा और 21 को एसडी कॉलेज में चित्रकला प्रदर्शनी का आयोजन किया जाएगा।