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जनपद से नहीं मिट रहा कुपोषण, स्थिति गंभीर

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मुजफ्फरनगर। राष्ट्रीय और राज्य पोषण मिशन के बावजूद जिले में नौनिहालों का स्वास्थ्य सुधरने का नाम नहीं ले रहा। पांच साल तक के बच्चों में पोषण की स्थिति बेहद खराब है। अप्रैल माह में दो लाख 32 हजार बच्चों के स्वास्थ्य की जांच की गई, तो इनमें 23 हजार से ज्यादा मासूम कुपोषण का शिकार पाए गए। इनमें से 2882 की स्थिति तो काफी गंभीर मिली।
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बच्चों में कुपोषण रोकने के लिए कई योजनाएं संचालित हैं। इनमें सबसे अहम भूमिका में बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग है। गांव-गांव और शहरी मोहल्लों में 2274 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं। इन केंद्रों पर माताओं और बच्चों में कुपोषण दूर करने के लिए पोषाहार का वितरण किया जाता है। इतने तामझाम के बावजूद जिले से कुपोषण खत्म नहीं हो रहा। अप्रैल माह में हुए सर्वे की स्थिति काफी खराब रही। जिले में पांच वर्ष तक की आयु के बच्चों की संख्या दो लाख 59 हजार 601 है। अप्रैल माह में इनमें से दो लाख 32 हजार 170 बच्चों का वजन किया गया। इस जांच के बाद जिले में पूर्व में हुई जांच और नए मिलाकर कुल 2882 बच्चे ऐसे पाए गए, जिनका वजन सामान्य से बेहद कम था। इन्हें अति कुपोषित यानी लाल श्रेणी में रखा गया है। इसी तरह 20 हजार 369 बच्चेे कुपोषित मिले हैं। इन्हें पीली श्रेणी में रखा गया है। इस तरह जिले में कुपोषित और अति कुपोषित बच्चों की संख्या 23 हजार 251 हो गई है। उधर, जिला कार्यक्रम अधिकारी आशा सिंह का कहना है कि कुपोषण में सुधार के लिए लगातार प्रयास चल रहे हैं। बड़ी संख्या में बच्चों के स्वास्थ्य में सुधार हुआ है।
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