अमरता का वरदान देती है भागवत
मोरना। भागवत पीठ शुकदेव आश्रम, शुक्रताल में कलश यात्रा के साथ भागवत कथा का शुभारंभ हुआ। पीठाधीश्वर स्वामी ओमानंद सरस्वती ने कहा कि भागवत अमरता का वरदान देती है। सच्चे सुख की प्राप्ति को जीवन में सहज और सरल बनें।
शुकदेव मंदिर और अक्षय वट की पूजा के बाद कलश यात्रा का शुभारंभ स्वामी ओमानंद सरस्वती ने किया। साथ ही कथा व्यास हरिदास को सम्मानित किया। स्वामी ने कहा कि भागवत मानव जाति के लिए भगवान वेदव्यास का वरदान है। भागवत जीवन सुधारती है, जीवन और मृत्यु के सत्य का बोध कराती है। जीवन में परिवर्तन लाती है। बुराइयों को दूर करने की शिक्षा देती है। मनुष्य में सकारात्मक तथा रचनात्मक दृष्टिकोण पैदा करती है। भागवत जीवन में भक्ति का संचार करती है, सुखी एवं पवित्र जीवन जीने की कला सिखाती है। सहजता और सरलता जीवन को आत्मिक सुख देती है। स्वार्थ, लोभ, मोह, राग आदि जीवन में सच्चे आनंद में बाधक है। निष्काम सेवा के भाव से जीये, सत्संग और भक्ति कार्यों में समय देना चाहिए। यज्ञमान ठाकुर भगवत सिंह, गोविंद कंवर, घनश्याम सिंह, गोपाल सिंह, भवानी सिंह ने विधि-विधान से पूजन किया। सुमन शास्त्री, राजू, हर्षमणि आदि का सहयोग रहा।