खतौली। कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय की बालिकाएं इस साल राज्यस्तरीय खेलकूद में अपनी प्रतिभा दिखाएंगी। प्रदेश में अपनी प्रतिभा का डंका बजाने के लिए स्कूल स्टाफ उनको प्रशिक्षण देकर फिट बनाने की तैयारी में लगा है।
गांव तिगाई में स्थित कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय की वार्डन ममता शर्मा ने बताया कि पूर्व में बालिकाओं की खेलकूद की प्रतियोगिताएं विद्यालय स्तरीय के बाद जिला स्तरीय होती थी। इस वर्ष से खेलकूद प्रतियोगिता मंडल स्तरीय पर होने के बाद राज्यस्तरीय होगी। जिला स्तरीय व मंडल स्तरीय प्रतियोगिता 20 और 30 जनवरी के बीच होगी। राज्यस्तरीय प्रतियोगिता बाराबंकी में अगले माह फरवरी में होना प्रस्तावित है। इनमें प्रतिभा दिखाने के लिए विद्यालय से 30 बालिकाओं को चयनित किया जाएगा। इसके लिए बालिकाओं को खेलकूद का प्रशिक्षण देकर उनको फिट किया जा रहा है। वार्डन ममता शर्मा व अध्यापिका पूजा व राखी गोयल बालिकाओं को खेलकूद का प्रशिक्षण दे रहीं हैं। स्कूल स्टाफ का सिर्फ एक ही मकसद है कि उनके विद्यालय की बालिकाओं को राज्यस्तरीय खेलकूद प्रतियोगिता में प्रतिभा दिखाने का मौका मिल सके।
इसके लिए वे बालिकाओं को विद्यालय प्रांगण में ही दौड़, रिले दौड़, गोला फेंक, कबड्डी, खो-खो आदि के गुर सिखा रही हैं। इसके अलावा बालिकाओं को स्कूल स्टाफ विद्यालय की दीवारों पर पेंटिंग बनाना भी सिखा रही हैं। बालिका पारुल, अमरीन, जासमीन, स्वाति, इशरत आदि का कहना है कि वे राज्य स्तरीय खेलकूद प्रतियोगिता में अपनी प्रतिभा दिखाने के लिए कड़ी मेहनत कर रही हैं।
नए स्टाफ ने विद्यालय बंद होने से बचाया
कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय पिछले वर्ष काफी सुर्खियों में रहा। बालिकाओं के साथ घिनौनी हरकत करने पर वार्डन के खिलाफ कार्रवाई हुई। डीएम के आदेश पर जांच के बाद अन्य स्टाफ की भी सेवा समाप्त कर दी गई थी। विद्यालय की बदनामी से अभिभावक अपनी बालिकाओं को विद्यालय से ले गए थे। जिस कारण विद्यालय में कई दिनों तक ताला लगा रहा। अधिकारियों ने विद्यालय में वार्डन की जिम्मेदारी ममता शर्मा को सौंपी। साथ में दो अध्यापिकाओं पूजा व राखी गोयल की नियुक्ति की। इस स्टाफ ने अभिभावकों के घर-घर जाकर अच्छी शिक्षा और बालिकाओं की सुरक्षा की गारंटी ली, तब कहीं जाकर बालिकाओं को भेजा गया। आज विद्यालय में 68 बालिकाएं शिक्षा ग्रहण कर रही हैं। इस तरह से नए स्टाफ ने विद्यालय को बंद होने से बचा लिया।
मेरे साथ अध्यापिका पूजा और राखी गोयल ने बालिकाओं को विद्यालय वापस लाने में अभिभावकों का विरोध भी झेला। इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी। उनका सिर्फ मकसद बालिकाओं का उज्ज्वल भविष्य बनाना है। पढ़ाई के साथ उनको खेलकूद प्रतियोगिताओं में अपनी प्रतिभा का डंका बजाने के लिए प्रशिक्षण दिया जा रहा है। - ममता शर्मा, वार्डन।