कागजों में बनकर तैयार हो गया बरामदा
मुजफ्फरनगर। मूक-बधिर स्कूल में विधायक निधि से बना बरामदा गायब हो गया है। बरामदे का निर्माण नवंबर 2016 में शुरू हुआ था। जुलाई 2017 में कार्य पूरा होने का प्रमाणपत्र भी रिकार्ड में जमा हो चुका है। सरकारी कागजों में बरामदा बनकर तैयार हो गया है। बाहर विधायक का बोर्ड भी लग गया है, लेकिन बरामदा है कहां यह कोई बताने को तैयार नहीं है।
जानसठ रोड स्थित आशादीप मूक-बधिर स्कूल में शहर विधायक कपिलदेव अग्रवाल ने एक कमरा और एक बरामदा बनाने की घोषणा की थी। उपचुनाव में जीतने के बाद कपिलदेव अग्रवाल ने नवंबर 2016 में कमरे और बरामदे के लिए दो लाख 37 हजार 900 रुपये भी जारी कर दिए। इनमें एक लाख 37 हजार कमरे पर और एक लाख बरामदे पर खर्च किया जाना था। निर्माण के लिए कार्यदायी संस्था आरईएस को बनाया गया। जुलाई माह में कमरा बनकर तैयार हो गया। कमरे के बाहर विधायक कपिलदेव अग्रवाल का बोर्ड भी लगा है। इस बोर्ड पर लिखा है कि आशादीप मूक-बधिर स्कूल में कमरा और बरामदा निर्माण का कार्य विधायक कपिलदेव अग्रवाल की ओर से किया गया है। बोर्ड पर नीचे आरईएस के अवर अभियंता आनंद कुमार, सहायक अभियंता राजेंद्र सिंह, अधिशासी अभियंता अशोक कुमार माथुर का नाम लिखा है। इस संबंध में परियोजना निदेशक कार्यालय से जानकारी की गई तो वहां पर रिकार्ड में कमरे और बरामदे दोनों का पैसा जारी हुआ है। पीडी विक्रम सिंह ने बताया कि उनके यहां आरईएस ने कार्यपूर्ति प्रमाण पत्र दो माह पहले जमा कर दिया है। कार्यपूर्ति प्रमाण पत्र में भी एक कमरा और एक बरामदा बनाया जाना दर्शाया है, जबकि मौके पर केवल एक कमरा ही है। सवाल यह उठ रहा है कि आखिरकार सरकारी एजेंसी द्वारा बनाया गया बरामदा कैसे गायब हो गया।
मेरे बेटों ने बनवाए दो कमरे
मुजफ्फरनगर। आशादीप धर्मार्थ सेवा समिति के अध्यक्ष वेदप्रकाश सिंघल ने बताया कि ऑडिटोरियम पर तीन कमरे बनाए गए हैं। इनमें दो कमरे मेरे बेटों ने बनवाए हैं। एक कमरा विधायक कपिलदेव अग्रवाल की निधि से बना है। बरामदा मौके पर नहीं है, यहां जो भी दानदाता सहयोग करता है हम सबका आभार व्यक्त करते हैं।
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आरईएस के अधिकारी देंगे जवाब
मुजफ्फरनगर। विधायक कपिलदेव अग्रवाल का कहना है कि हमने तो अपनी निधि से पैसा जारी कर दिया है। अब कार्यदायी संस्था जवाबदेह है कि उसने क्या बनाया क्या नहीं। अगर पैसा खर्च नहीं किया गया है तो गलत है। इसकी जांच कराई जाएगी।
कमरे के सामने छज्जा बना दिया
मुजफ्फरनगर। आरईएस के अधिशासी अभियंता एके माथुर का जवाब ही गोलमोल है। उन्होंने बताया कि कमरे के सामने बरामदे की जगह नहीं थी, इसलिए हमने छज्जा बना दिया। इसमें ऐसी कोई बड़ी बात नही हैं।