1334 छात्रों का भविष्य संकट में
रणवीर सैनी
मुजफ्फरनगर। प्रदेश सरकार की बड़ी संस्था गांधी पॉलिटेक्निक के 1334 छात्र-छात्राओं के सामने परीक्षा देने को लेकर संकट खड़ा हो गया है। पॉलिटेक्निक प्रशासन ने प्रतिपूर्ति शुल्क को लेकर गलत फिडिंग कर दी, इस कारण सरकार से छात्रों को पैसा नहीं मिला। एससी के 329 छात्रों का फीस का सारा पैसा सरकार को देना था, लेकिन पैसा नहीं आने से परीक्षा से पहले ही वे तनाव में हैं। यही स्थिति उन सामान्य, ओबीसी, अल्पसंख्यक वर्ग के विद्यार्थियों की है जिनके परिजनों ने उधार पर पैसे उठाकर फीस जमा की है।
शिक्षा ऋषि स्वामी कल्याणदेव द्वारा स्थापित गांधी पॉलिटेक्निक की पहचान प्रदेश के गिने-चुने सरकारी शिक्षण संस्थानों में है। प्रदेश स्तर पर होने वाली परीक्षा में टॉपर छात्र ही इस संस्था में आते हैं। अधिकतम बच्चे गरीब परिवारों के हैं। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को यहां सबसे बड़ा लाभ यह होता है कि सरकार सबसे पहले इन्हीं संस्थाओं के छात्रों का छात्रवृत्ति और प्रतिपूर्ति शुल्क जारी करती है, जिससे इनकी शिक्षा में कोई बाधा न हो। इसी लिए सत्र के शुरूआत में ही जून माह में छात्रों की फिडिंग का कार्य पूरा करा लिया जाता है। इस बार भी एक जून से सात अगस्त 2018 तक छात्रों की फिडिंग का कार्य चला। फिडिंग हुए 1334 छात्रों में 329 एससी, 707 ओबीसी, 209 सामान्य, 89 अल्पसंख्यक वर्ग के हैं। शासनादेश के अनुसार प्रतिपूर्ति शुल्क के रूप में एससी की रेगूलर की 17570 और सेल्फ फाइनेंस की 19570 रुपये की फीस फिडिंग होनी थी और अन्य श्रेणी के सभी छात्रों की दस हजार के हिसाब से फिडिंग की जानी थी। कॉलेज प्रशासन ने सभी छात्रों के 3510 रुपये भर दिए। एक जून 2018 से फिडिंग की प्रक्रिया शुरू हुई। सूची फीड होने के बाद 15 जून को पहला पत्र कॉलेज को लिखा गया, इसके बाद 23 जून को दूसरा पत्र भेजा। समाज कल्याण विभाग ने गलती सुधारने के लिए 26 जुलाई 2018 को फिर पत्र लिखा, जवाब नहीं आया तो प्रधानाचार्य के नाम 31 जुलाई 18 को एक पत्र ओर जारी हुआ। इससे पहले पांच जून को सभी प्रधानाचार्यों की बैठक बुलाई गई, लेकिन विद्यालय की ओर से न तो कोई बैठक में गया और न ही किसी पत्र का जवाब दिया गया। अंत में सात अक्तूबर को एक पत्र ओर जारी किया गया और फिडिंग को सही करने के लिए कहा, लेकिन कॉलेज प्रशासन पर जूं नहीं रेंगी। स्थिति यह हुई कि छात्रों के खातें में 3500 रुपये के हिसाब से आ गए। कुछ दिन पहले जब यह पैसा आया तो छात्रों में हड़कंप मच गया। गरीब परिवारों के बच्चे फीस कहां से देंगे और एससी के बच्चों का पूरा पैसा कैसे जमा होगा, इससे छात्र घबरा गए। जिला समाज कल्याण अधिकारी अर्चना का कहना है कि उनकी ओर से कोई चूक नहीं हुई, कॉलेज प्रशासन की गलती है।
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एक करोड़ से अधिक मिलना है छात्रों को
मुजफ्फरनगर। प्रतिपूर्ति शुल्क के रूप में गांधी पॉलिटेक्निक के छात्रों के खातों में एक करोड़ से अधिक आना है। छात्र नेता अनमोल मित्तल ने बताया कि एससी के छात्र को जहां पूरी फीस वापिस मिलेगी, वहीं अन्य श्रेणी के सभी छात्रों को दस हजार प्रत्येक के हिसाब से प्रतिपूर्ति शुल्क मिलना है।
अफसरों के सामने स्पष्टीकरण रख दिया
मुजफ्फरनगर। गांधी पॉलिटेक्निक के प्रधानाचार्य कुलदीप शर्मा के पास कोई स्पष्ट जवाब नहीं है। उनका कहना है कि एडीएम प्रशासन अमित सिंह के सामने अपना स्पष्टीकरण दे दिया है। छात्रों की समस्या के निदान के लिए वह बुधवार को लखनऊ जाएंगे। जल्दी ही समस्या का हल होगा।