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पैरा एशियन गेम्स में अचूक तीर साधेगी ज्योति

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तीरंदाजी टीम में खेलेगी गोयला की दिव्यांग बेटी
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मुजफ्फरनगर। पैरा एशियन गेम्स में जिले की बेटी ज्योति बालियान अपने अचूक तीर साधेगी। इंडोनेशिया के जकार्ता में छह से 13 अक्तूबर तक होने वाले पैरा एशियाई खेलों के लिए तीरंदाजी स्पर्धा में यूपी की वह अकेली खिलाड़ी है, जिसने एशियाड टीम में जगह बनाई है। कुल सात तीरंदाज जकार्ता में देश का प्रतिनिधित्व करेंगे। फिलहाल चयनित खिलाड़ियों का प्रशिक्षण महाराष्ट्र के औरंगाबाद स्थित साईं सेंटर में चल रहा है।
एशियाड में कांस्य पदक विजेता दिव्या काकरान के बाद शाहपुर के गोयला गांव की बेटी ज्योति बालियान ने तीरंदाजी में नई उम्मीद जगा दी है। जज्बे और हौसले के दम पर दिव्यांग ज्योति ने पैरा एशियन गेम्स की टीम में जगह बनाई है। कंपाउंड राउंड 50 मीटर स्पर्धा में वह अपने तीर साधेगी। श्री माता वैष्णो देवी स्पोर्ट्र्स कॉम्पलेक्स कटरा की यह प्रशिक्षु खिलाड़ी अपना दूसरा पैरा एशियाड खेलेगी। उसने वर्ष 2014 में दक्षिणी कोरिया के इंचोयान एशियाई खेलों में भी भाग लिया था। ज्योति को तराशने में तीरंदाजी के नेशनल कोच कुलदीप वेदवान की कड़ी मेहनत है। उनकी बागपत जिले के गांव धनौरा टीकरी में आर्चरी एकेडमी है, वहीं रह कर ज्योति ने विधिवत अभ्यास किया। आगामी पैरा एशियाड के लिए भारत की तीरंदाजी टीम में चार पुरुष और तीन महिला खिलाड़ियों का चयन किया गया है। राष्ट्रीय कोच कुलदीप वेदवान के मुताबिक यूपी से ज्योति बालियान, महाराष्ट्र के नासिक से मिताली गायकवाड, हरियाणा के गुरुग्राम की पूजा जकार्ता में अपनी प्रतिभा दिखाएगी। हरियाणा के कैथल से हरविंदर सिंह और रोहतक से साहिल, जम्मू के कटारा से राकेश कुमार तथा राजस्थान के बीकानेर से श्याम सुंदर स्वामी देश के लिए खेलेंगे। पैरा एशियाड में कंपाउंड राउंड 50 मीटर तथा 70 मीटर रिकव राउंड तीरंदाजी की दो स्पर्धाओं में भारत चुनौती रखेगा। फिलहाल सभी चयनित खिलाडिय़ों का गहन प्रशिक्षण औरंगाबाद के साई सेंटर में चल रहा है।
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राष्ट्रीय खेलों में जीत चुकी गोल्ड मेडल
(फोटो)
मुजफ्फरनगर। शाहपुर के गोयला गांव में बेटी ज्योति के चयन पर परिवार मेें हर्ष का माहौल है। मां मीरा देवी, भाई कुलदीप बालियान, बड़ी बहन प्रीति को आशा है कि पैरा एशियाड से वह पदक लेकर लौटेगी। ज्योति के पिता देवेंद्र सिंह का कई साल पहले निधन हो चुका है। दिव्यांगता की मजबूरी को चुनौती देकर उसने आर्चरी में मेहनत को लक्ष्य बनाया। वर्ष 2010 में भुवनेश्वर में हुए पैरा नेशनल गेम्स में ज्योति ने तीन स्वर्ण पदक जीते थे। 2011 में महाराष्ट्र के अमरावती में शानदार प्रदर्शन कर वह पांच गोल्ड जीतने में कामयाब हुई। महाराष्ट्र के सतारा में वर्ष 2012 में उसने अपना प्रदर्शन बरकरार रखा। यहां भी पांच स्वर्ण पदक पर अचूक तीर साधे। गत वर्ष चीन के बीजिंग में आयोजित पैरा वल्र्ड चैंपियनशिप में ज्योति ने भाग लिया। वर्ष 2017 में ही आंध्र प्रदेश के हैदराबाद में हुई नेशनल चैंपियनशिप में भी उसे दो स्वर्ण पदक मिले।
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पैरा एशियाड में पदक की उम्मीद: कुलदीप वेदवान
मुजफ्फरनगर। नेशनल कोच कुलदीप वेदवान कहते है कि भारतीय तीरंदाज अन्य देशों के खिलाड़िय़ों को कड़ी चुनौती देने में सक्षम है। चेक गणराज्य में जुलाई माह में हुई पैरा वर्ल्ड रैंकिंग में राकेश और तारिक ने दो पदक जीते है। जकार्ता पैरा एशियाड में भी पदक की पूरी उम्मीद है। वेस्ट यूपी में तीरंदाजी में खिलाड़िय़ों का रुझान बढ़ा है। मेरठ के गुरुकुल प्रभात आश्रम भोला झाल में स्वामी विवेकानंद सरस्वती के निर्देशन में आर्चरी प्रशिक्षण का मुख्य केंद्र चल रहा है। धनौरा टीकरी गांव के केंद्र पर भी 50 से ज्यादा खिलाड़ी प्रशिक्षण ले रहे है। जिनमें से कई राष्ट्रीय स्तर पर पदक जीत चुके है।
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