दलितों के पंचायत को प्रशासन ने नहीं दी अनुमति
मुजफ्फरनगर। दलित आंदोलन के दौरान हुई हिंसा में निर्दोष दलितों को जेल भेजने के विरोध में 30 मई को होने वाली दलितों की पंचायत को प्रशासन ने अनुमति नहीं दी। एसपी सिटी ने आयोजक से वार्ता की कैराना उपचुनाव होने की बात बताई, जिस पर आयोजन ने पंचायत का फिलहाल स्थगित कर दिया। साथ ही कहा कि उनकी मांगे पूरी नहीं हुई तो पंचायत होगी।
भारतीय दलित एकता समिति ने 30 मई को जिला मुख्यालय पर दलितों की पंचायत की घोषणा की थी। समिति के अध्यक्ष गांव रथेड़ी निवासी शोभाराम का कहना है कि दो अप्रैल को दलित आंदोलन के दौरान हुई हिंसा के मामले में पुलिस ने निर्दोषों को जेल भेजा है। इसके विरोध में यह पंचायत होनी थी। इसके लिए समिति के पदाधिकारी पूरी तैयारी में जुटे थे। दलितों की पंचायत को लेकर पुलिस प्रशासन टेंशन में थे। शोभाराम ने पंचायत की अनुमति के लिए सिटी मजिस्ट्रेट के यहां प्रार्थना पत्र दिया था, जिस पर सिटी मजिस्ट्रेट ने सीओ सिटी से रिपोर्ट मांगी थी। सीओ सिटी हरीश भदौदिया ने रिपोर्ट में कहा कि 30 मई को महापंचायत की अनुमति दिया जाना संभव नहीं है। क्योकि कैराना में उपचुनाव है और 31 मई को वहां मतगणना होनी है, जिसके लिए जिले से काफी फोर्स कैराना गया है। इस रिपोर्ट के आधार पर सिटी मजिस्ट्रेट अमित सिंह ने दलित पंचायत की अनुमति देने से इंकार कर दिया। सोमवार को एसपी सिटी ओमवीर सिंह ने पंचायत आयोजक शोभाराम को अपने कार्यालय बुलाया। पुलिस के अनुमति देने से इंकार किए जाने के पीछे मजबूरी बताई, जिस पर शोभाराम ने कहा कि वे फिलहाल पंचायत स्थगित कर रहे हैं। साथ ही कहा कि जेल भेजे गए निर्दोषों को रिहा किया जाए तथा जिन लोगों ने दलितों को पकड़ कर मारपीट कर पुलिस के हवाले किया, उनके खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए। यदि प्रशासन उनकी मांगों को मान लेता है, तो उन्हें पंचायत करने की आवश्यकता नहीं रहेगी। इस पर एसपी सिटी ने निष्पक्ष कार्रवाई का आश्वासन दिया। शोभाराम ने बताया कि अनुमति नहीं मिलने से पंचायत अब नहीं होगी, लेकिन यदि उनकी मांग प्रशासन ने नहीं मांगी तो पंचायत की जाएगी। उधर, पंचायत नहीं होने पर अधिकारियों ने राहत की सांस ली है।