रथयात्रा पर फूलों की बारिश
मुजफ्फरनगर। जैन नगर के श्री दिगंबर जैन पंचायती मंदिर से क्षमावाणी दिवस पर रथयात्रा निकाली गई। विभिन्न मार्गों से निकाली गई यात्रा का अनेक स्थानों पर फूल बरसा कर स्वागत किया गया। श्रद्धालुओं ने भगवान का गुणगान किया। जैन मुनि ने कहा कि क्षमा वाहिनी ही दुनिया में सबसे बड़ा धर्म और दान है। मनुष्य को अपने जीव-जंतुओं समेत लोगों पर दया करनी चाहिए।
क्षमावाणी पर्व पर वार्षिक रथयात्रा जैन मंदिर से प्रारंभ होकर अनेक मार्गों से निकाली गई। रथयात्रा में भगवान महावीर जी विराजमान रहे। श्रद्धालुओं ने रथयात्रा का अनेक स्थानों पर फूल बरसा कर स्वागत किया। रथयात्रा ईदगाह, प्रेमपुरी से होते हुए वापस मंदिर परिसर में सम्पन्न हुई। रथयात्रा में भगवान जी को खुवारसी अशोक कुमार जैन, सारथी संजय जैन, सुशील जैन, अरिदमन जैन इंद्र रहे, जबकि खजांची संदीप जैन बने। इससे पहले बुधवार शाम भजन संध्या का आयोजन किया गया, जिसमें अनेक भजनों पर श्रद्धालुओं ने आनंद लिया। उधर, रथयात्रा के बाद जैन मुनि शिव भूषण जी महाराज ने कहा कि क्षमा मांगने से कोई व्यक्ति छोटा नहीं होता है। क्षमा वाहिनी से दुनिया में सबसे बड़ा धर्म और दान है। इस दौरान संयोजक सुनील जैन, सुशील जैन, नवीन जैन, णमोकार जैन, देवेंद्र जैन, पवन जैन, राजेंद्र जैन, राजकुमार जैन, अरुण कुमार जैन, संजीव जैन, राजेश जैन, अंकुर जैन, विपिन जैन, राजेश जैन आदि मौजूद रहे।
जो जितना क्रोध करेगा, वह उतना ही कमजोर
मुजफ्फरनगर। श्री दिगंबर जैन अतिशय वहलना क्षेत्र में मंगल प्रवचन में आचार्य ज्ञान सागर जी महाराज ने कहा कि क्षमा और क्रोध के अपने मायने हैं, जो जितना सामर्थ्यवान होगा, वह उतना ही क्षमावान होगा। वहीं, जो जितना क्रोध करेगा, वह उतना ही कमजोर होगा। मनुष्य को जीवन प्रेम पूर्वक जीना चाहिए। उन्होंने कहा कि क्रोध का मुख्य कारण उपेक्षाएं हैं। मनुष्य एक-दूसरे से उपेक्षाएं रखते हैं। जिसके पूरे नहीं होने पर क्रोध की भावनाएं आती हैं। आचार्य ने कहा कि नकारात्मक पक्ष अधिक प्रबल होने पर क्रोध होता है, जबकि हमें प्रत्येक घटना का सकारात्मक पक्ष भी देखना चाहिए।
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