समान अंकों पर डीएम ने की पुनर्मूल्यांकन की संस्तुति
मुजफ्फरनगर। यूपी बोर्ड परीक्षा परिणाम में नकल माफिया का खेल उजागर होने से खलबली मची है। एक ही परीक्षा केंद्र के 573 छात्रों को फिजिक्स में एक समान 52-52 अंक मिले हैं। इससे परीक्षा परिणाम में गड़बड़ी की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। अमर उजाला में इसका खुलासा होने के बाद डीएम अजय शंकर पांडेय ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने इन परीक्षार्थियों की कापियों का पुनर्मूल्यांकन कराने के लिए शासन तथा माध्यमिक शिक्षा परिषद के अधिकारियों को संस्तुति की है।
जनता इंटर कॉलेज बाढ़ में बनाए गए यूपी बोर्ड के परीक्षा केंद्र पर एसटीएफ ने 22 फरवरी को छापेमारी कर सामूहिक नकल पकड़ी थी। इस दिन इंटर फिजिक्स का प्रश्नपत्र था। नकल पकड़े जाने के बाद इस प्रश्नपत्र की परीक्षा निरस्त कर दोबारा जीआईसी मुजफ्फरनगर का सेंटर पर कराया गया। 70 नंबर के प्रश्नपत्र में 623 छात्रों में से 573 को समान 52-52 अंक मिले हैं। इन परीक्षार्थियों को प्रैक्टिकल में भी 30 में से 30 नंबर दिए गए। एक विषय में इतने परीक्षार्थियों को समान अंक मिलना बोर्ड परीक्षा के मूल्यांकन और परिणाम पर सवाल खड़ा करता है। इन सभी विद्यार्थियों ने व्यक्तिगत परीक्षार्थी के रूप में परीक्षा दी है। व्यक्तिगत रूप से परीक्षा में शामिल होने के बावजूद 623 में से 400 से अधिक को प्रथम श्रेणी मिली है तथा हिंदी, बायोलॉजी और फिजिक्स जैसे विषयों में विशेष योग्यता हासिल की है। एसटीएफ की कार्रवाई के बाद जनता इंटर कॉलेज बाढ़ केंद्र पर गणित की परीक्षा हुई थी। इसमें भी सैकड़ों अभ्यर्थियों को 33-33 नंबर मिले हैं। अमर उजाला की पड़ताल में इस बात का खुलासा होने के बाद खलबली मची है। डीएम अजय शंकर पांडेय ने बताया कि इतने अभ्यर्थियों के एक ही विषय में समान अंक आना प्रथम दृष्टया संदिग्ध लगता है। उन्होंने बताया कि संबंधित परीक्षार्थियों की उत्तर पुस्तिकाओं के पुनर्मूल्यांकन के लिए शासन और बोर्ड के अधिकारियों को संस्तुति की गई है।