बाबा फकीरादास की सिद्ध कुटी पर मेले की तैयारी शुरू
देवबंद (सहारनपुर)। जिले में मिरगपुर में बाबा फकीरादास की सिद्ध कुटी पर वार्षिक मेले की तैयारी शुरू कर दी गई है। यह मेला एक मार्च से शुरू होने जा रहा है। बता दें कि यह ऐसा अकेला गांव है जो गुरू बाबा फकीरादास की ओर से दी गई प्रतिज्ञा का सैंकड़ाें साल से श्रद्धा के पालन करता आ रहा है। इसलिए गांव के लोग बाबा को अपना भगवान मानकर उनकी पूजा करते हैं।
मिरगपुर के ग्रामीणों की माने तो करीब 550 वर्ष पूर्व जहांगीर के शासनकाल में गुरू बाबा फरीकादास पंजाब से मिरगपुर गांव में आए थे। उस समय एक झगड़े में गांव के करीब पांच लोग दिल्ली जेल में बंद थे। बाबा ने उक्त लोगों को जेल से इस शर्त पर रिहा कराया था कि गांव का कोई भी व्यक्ति कभी धूम्रपान नहीं करेगा। साथ ही मांसाहार से भी सदैव परहेज रखेगा। तब पूरे गांव ने श्रद्धापूर्वक बाबा की शर्त को आज्ञा के रूप में स्वीकार कर प्रतिज्ञा की थी। बाबा ने 52 तामसिक वस्तुओं इनमें अंडा, प्याज, लहसुन, शलगम, सिरका, बीड़ी, सिगरेट, भांग, शराब, अफीम आदि शामिल है से परहेज रखने की ग्रामीणों को शपथ दिलाई थी। महंत मनोहर दास ने बताया कि गुरु बाबा फकीरादास के बताए नियमों को अपना धर्म मानकर गांव के लोग पालन करते आ रहे हैं। मिरगपुर के लोग अपने प्राण त्याग सकते हैं परंतु बाबा के बताए नियमों को नहीं तोड़ सकते हैं। उन्होंने बताया कि बाबा की सिद्धकुटी पर प्रतिवर्ष मेला आयोजित किया जाता है। जिसमें यूपी ही नहीं उत्तराखंड से भी बड़ी संख्या में बाबा के भक्तजन पहुंचते हैं। मेले को ग्रामीण होली व दीपावली की तरह मनाते हैं। इस बार यह मेला 1 मार्च को आयोजित किया जाएगा।
बाबा के चमत्कार पर ग्रामीणों को हो गया था यकीन
ग्रामीण चौधरी ओमपाल सिंह ने बताया कि बाबा फकीरादास पंजाब के जिला संगरूर के गांव घरांचों से मिरगरपुर गांव में जहांगीर के शासनकाल में आए थे। बाबा को दूध पीने की इच्छा हुई तो एक बिना ब्याही कटिया को देखकर बोले इसका दूध निकालो। तब लोगों ने कहा कि यह दूध कैसे देगी। इस पर बाबा ने कहा दूध निकालना शुरू करो। उसने दूध देना शुरू किया तो गांव के लोगों ने उसे बाबा का चमत्कार माना। लेकिन तब लोगों ने कहा कि हमारे पांच आदमी दिल्ली जेल में बंद हैं। उन्हें छुड़ाकर दिखाओ तब ही हम चमत्कार मानेंगे। ऐसा ही हुआ। बाबा ने अपना शरीर मिरगपुर में छोड़ दिया और पांच लोगों को जेल से रिहा कराकर वापस शरीर में लौट आए। इससे लोगों को बाबा के चमत्कार पर यकीन हो गया।
तामसिक वस्तुओं के प्रयोग से होता है नुकसान
सहकारी गन्ना समिति के पूर्व चेयरमैन चौधरी प्रविंदर सिंह ने बताया कि बाबा फकीदास की तपोस्थली पर प्रतिवर्ष भव्य आयोजित किया जाता है। इस दिन ग्रामीणों के सभी रिश्तेदार मेले में शरीक होते हैं। बाबा की प्रतिभा का पूरा गांव आज भी पालन करता आ रहा है। जो व्यक्ति गलती से तामस्कि वस्तुओं का सेवन कर लेता है उसका कुछ न कुछ नुकसान अवश्य होता है।
समस्त जनपद के लिए मिसाल बना है मिरगपुर
ग्रामीण सुंदर सिंह ने बताया कि मिरगपुर के लोग मेले को त्योहार की तरह मनाते हैं। रिश्तेदार भी इस दिन गांव पहुंचकर सिद्धकुटी पर प्रसाद चढ़ाकर मेले का आनंद उठाते हैं। उन्होंने बताया कि मिरगपुर पूरे जनपद के गांवों के लिए आज भी मिसाल बना हुआ है।
घर-घर में बनता है देशी घी का हलवा व पेड़े
ग्रामीण रफल सिंह कहते हैं प्रत्येक वर्ष फाल्गुन मास की पहली दशमी तिथि को प्राचीन गुरुद्वारा (सिद्धकुटी) पर मेला लगता है। वार्षिक मेले के दिन प्रत्येक घर में देशी घी का हलुआ और पेडे़ का प्रसाद बांटा जाता है। सुबह के समय बाबा की समाधि स्थल पर हवन पूजन किया जाता है। इसके बाद श्रद्धालुओं की प्रसाद चढ़ाने को भीड़ लग जाती है।