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क्रांतिकारी राष्ट्रसंत 10

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राष्ट्रसंत 108 तरुण सागर महाराज को नमन
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खतौली ( मुजफ्फरनगर)।
दिगंबर जैन महासमिति परिवार ने राष्ट्रसंत जैन मुनि 108 तरुण सागर महाराज के देव गमन पर विनयांजलि सभा का आयोजन भागीरथी मंदिर प्रवचन हाल में किया। इनकी अंतिम यात्रा दिल्ली से पदविहार के साथ मुरादनगर स्थित तरुण सागरम तीर्थ पहुंची। पद यात्रा में काफी संख्या में जैन धर्म के लोग शामिल हुए।
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प्रवचन हाल में आयोजित धर्मसभा में महासमिति संभागीय अध्यक्ष रामकुमार जैन ने कहा कि अनेक संतों के सानिध्य में मुनिश्री का अंतिम संस्कार किया गया। सभा में वक्ताओं ने बताया कि क्रांतिकारीवाणी चुप नहीं होती है। उनकी वाणी सदा हमारे बीच रहेगी। वे समाज के राष्ट्रसंत थे। समाज को प्रवचनों के माध्यम से ऊंचाईयां देते हुए जीवन के सत्य का ज्ञान कराया। 8 मार्च 1981 को गृह त्याग कर आचार्य श्री पुष्पदत सागर जी महाराज से ब्रह्मचारी व्रत ग्रहण किया था। उन्होंने दिल्ली में लाल किले से संपूर्ण देश को संबोधित किया था। उनके कड़वे प्रवचन नामक पुस्तक की देश में लगभग 15 लाख से अधिक प्रतियां प्रकाशित हुई थी। मुनि तरुण सागर महाराज ने वर्ष 2015 में बिद्दीवाड़ा स्थित जक्कीवाला मंदिर व जैन मंडी मंदिर में प्रवास किया था। केके जैन कालेज के सभा स्थल पर एक सप्ताह तक प्रवचन किए थे। वर्ष 2000 से पहले भी पुलक सागर महाराज के साथ जैन कन्या विद्यालय में प्रवास के दौरान इंदिरा मूर्ति स्थित पंडाल में धर्म जागरण किया था। वर्ष 2001 में लाल किले पर सभी धार्मिक आस्थाओं के धर्म गुरुओं को साथ लेकर अहिंसा महाकुंभ का आयोजन अखिल भारतीय स्तर पर कराया था। सन 2015 में खतौली में मंगल प्रवेश से पूर्व मेपल्स अकादमी में प्रवास किया था। इस विनयांजलि में रामकुमार जैन, डा. ज्योति, विनीत, जयचंद, सुनील ठेकेदार, नीरज प्रवक्ता, शीलचंद, जयभगवान, अरुण, राकेश अंबर, अजय प्रवक्ता आदि उपस्थित रहे।
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