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जीवात्मा परमात्मा का अंश है।

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पुरकाजी। कस्बे के सनातन धर्म शिव मंदिर में चल रही भागवत कथा में कथा व्यास गंगोत्री तिवारी मृदुल महाराज ने कहा कि जीवात्मा परमात्मा का अंश है। जब जीवात्मा परमात्मा की ओर अग्रसर होती है तो नाग देवता खुश होते हैं।
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कथा व्यास ने कहा कि रास का अर्थ परमात्मा से मिलन है। एक बार ब्रज की गोपियां सब कुछ छोड़कर भगवान श्रीकृष्ण की शरण में आ गईं, तो उन्होंने धर्म शास्त्र की बात सुनाकर उनकी परीक्षा ली। तो गोपियां व्याकुल हो उठीं। जिनकी व्याकुलता देखकर ठाकुर जी ने रास करने का निर्णय लिया था। परंतु जब रासमंडल की सभी तैयारियां पूरी हो जाती हैं तो इसी बीच में राधा कृष्ण खडे़ हो जाते हैं। भगवान श्री कृष्ण अपने भक्तों में समाए हुए हैं जो अपने भक्तों का कभी अहित नहीं होने देते हैं। मनुष्य को अपने व्यस्त जीवन में से थोड़ा समय निकालकर प्रभु की भक्ति में जरूर लगाना चाहिए। जो मनुष्य प्रभु की भक्ति नहीं करता उसका जीवन व्यर्थ है। जो प्रभु भक्ति में समावेश हो जाता है उसका जीवन धन्य हो जाता है। इस दौरान विरेंद्र गोयल, अर्जुन गुप्ता, मणिकांत गोयल, सुशील कर्णवाल, अतुल विक्रम, रामवतार सिंघल, अनिल गुप्ता सहित श्रद्धालुजन मौजूद रहे।
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