मुजफ्फरनगर। दंगे के बाद से देश की राजनीति में मुजफ्फरनगर अहम हो गया है। यहां के चुनाव परिणामों का दूरगामी असर होता है। नगर पालिका परिषद में भाजपा अपनी जीत मानकर चल रही थी। नतीजे आते ही पार्टी को करारा झटका लगा है। जिला प्रभारी मंत्री महाना ने जिले की चुनावी सभा में कहा था कि मुजफ्फरनगर और अयोध्या के चुनावी नतीजे देश की दिशा तय करते हैं, ऐसे भाजपा की यह हार राष्ट्रीय राजनीति में चर्चा का विषय रहेगी।
सपा सरकार में 2013 के दंगों के दौरान सुर्खियों में आए मुजफ्फरनगर पर देश के बड़े नेताओं की निगाहें रहती हैं। यहां की हार-जीत के दूरगामी नतीजे सामने आते हैं। लोकसभा और विधानसभा चुनाव में बीजेपी का माहौल बनाने में मुजफ्फरनगर दंगे की भूमिका को दरकिनार नहीं किया जा सकता। भाजपा ने अपने पक्ष में यहीं से चुनावी रणनीति तय की। यही वजह है कि नगर पालिका के चुनाव परिणाम पर सबकी नजरें टिकी थीं। पालिका परिषद के चुनाव में लंबे अरसे तक भाजपा का वर्चस्व रहा है। सूबे में सरकार चाहे किसी की रही हो, लेकिन पालिका की राजनीति में बीजेपी हावी रहा करती थी। 2012 में पहली बार पासा पलटा और कांग्रेस के पंकज अग्रवाल चुनाव जीत गए। इससे पहले तीन योजनाओं में लगातार बीजेपी के चेयरमैन जीते थे। केंद्र और प्रदेश में भाजपा की सरकारें होने की वजह से पार्टी पालिका चुनाव में अपनी जीत पक्की मानकर चल रही थी। कांग्रेस से मिली हार के बाद भाजपा को तगड़ा झटका लगा है। कार्यकर्ताओं को हार से उबरने में लंबा वक्त लगेगा। चुनाव से ठीक पहले सूबे के कैबिनेट मंत्री एवं जिला प्रभारी सतीश महाना ने कार्यकर्ताओं की सभा में कहा था कि मुजफ्फरनगर और अयोध्या के चुनाव परिणाम देश की दिशा तय करते हैं। महाना का यह कथन आगामी राजनीति में क्या असर दिखाएगा, यह देखने की बात रहेगी।
------------------------
सोशल मीडिया पर बहस
मुजफ्फरनगर। कांग्रेस की जीत के बाद सोशल मीडिया में चुनाव नतीजे पर बहस छिड़ी रहीं। हतोत्साहित कार्यकर्ताओं ने कहा कि गुजरात चुनाव के प्रचार में राहुल गांधी कहेंगे कि मुजफ्फरनगर की जनता ने हमारा साथ दिया है। सांप्रदायिकता और नफरत फैलाने के विरोध में कांग्रेस प्रत्याशी को जनादेश मिला है।