पुराने दामों पर नहीं बिकेंगी दवाइयां
मुजफ्फरनगर। एक जुलाई से लागू हुए जीएसटी के बाद भी मेडिकल स्टोरों पर लोगों को सस्ती दवाइयां मुहैया नहीं हो रही हैं। रिटेलर और होलसेल व्यापारी स्टॉक खत्म होने की आड़ में लोगों को दवाइयां देने से बच रहे हैं। इसको लेकर स्वास्थ्य मंत्रालय ने अभियान चलाकर जीएसटी के दायरे में आई दवाइयों के साथ उनकी खरीद-फरोख्त को सही रूप से करने के निर्देश दिए हैं।
जीएसटी लगने के बाद कुछ जीवन रक्षक दवाइयों के मूल्यों पर प्रभाव पड़ा है। दवाइयों को लेकर दवा करोबारियों में संशय बना है, क्योंकि सही रूप से दवाइयों पर लगे जीएसटी की जानकारी नहीं हो रही है। कौन सी दवाइयां किस दर में रखी गई हैं और कौन किस मूल्य पर विक्रय होनी हैं। इसके अलावा दवाइयों का बिल किस ढंग से बनाया जाए। जीएसटी के पोर्टल पर इनकी फीडिंग और डाटा सुरक्षित कैसे होगा, इन बातों के विपरीत मेडिकल स्टोर संचालक पुराने रेट पर ही दवाइयां बेच रहे हैं। वहीं, तीमारदार और उपभोक्ताओं को भी सही रूप से दवाइयों पर लगी जीएसटी की जानकारी नहीं है। इससे दुविधा बढ़ गई है।
शिकायतों के बाद स्वास्थ्य मंत्रालय और प्रदेश सरकार ने दवा करोबारियों को जीएसटी नियम, रूप आदि समझाने के लिए जिला औषधि निरीक्षक को जिम्मेदारी दी है। व्यापारियों को जीएसटी में शामिल हुई दवाइयों को बेचने का तरीका समझाया जाएगा। वहीं, पुराने रेट पर दवाइयों बेच रहे स्टोर संचालक और होलसेलरों के खिलाफ विभागीय रूप से कार्रवाई होगी। अभियान के लिए जिला औषधि निरीक्षक के नेतृत्व में टीम कार्य करेगी। ड्रग इंस्पेक्टर जगवीर सिंह ने बताया कि दवाइयों को लेकर ग्राहकों के साथ मेडिकल स्टोर संचालकों, होलसेलरों में जीएसटी पर संशय बना है। दवाइयों की बिक्री के साथ जीएसटी की दरें हुई हैं, लेकिन व्यापारी और ग्राहक नए-पुराने मूल्य के बीच फंसा है। इस गुत्थी को सुलझाने के लिए अभियान चलाया जाएगा।