हौसले के बल पर महिलाओं ने बढ़ाई देश की शान
मुजफ्फरनगर। बेटियों को हौसला मिले तो उनकी कामयाबी की उड़ान को कोई नहीं रोक सकता। जिले की बेटी शैलजा शर्मा भी ऐसी ही बेटियों में शामिल हैं। वह खुद तो आगे आगे बढ़ी ही, अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणास्त्रोत बनीं। वर्ष 2013 बैच की आईएएस अधिकारी शैलजा वर्तमान में बिहार के सहरसा जिले में डीएम के पद पर तैनात हैं।
शहर के आत्मकुंज, कंबल वाला बाग निवासी डॉ वागीश चंद्र शर्मा की पुत्री ने शैलजा तीन बहनों शालिनी शर्मा, श्वेता शर्मा और भाई आशीष वशिष्ठ से बड़ी हैं। दोनों बहनें भी इंजीनियर हैं, जबकि भाई सर्जन हैं। उन्हें बीते फरवरी माह में उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर स्कॉच स्वस्थ भारत मेरिट पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।
दिल्ली में नाम रोशन कर रही जिले की बेटी
2014 बैच की आईआरएस मनु पंवार बनी प्रेरणास्त्रोत
मुजफ्फरनगर। जिले की बेटी मनु पंवार महिलाओं के लिए प्रेरणास्त्रोत हैं। 2014 बैच की आईआरएस अधिकारी मनु वर्तमान में दिल्ली में डिप्टी कमिश्नर के पद पर तैनात हैं। उनके पति अरिंदम चौधरी भी हिमाचल प्रदेश कैडर के आईएएस अधिकारी हैं। माता निर्मल पंवार बताती हैं कि मनु की शुरुआती शिक्षा होली एंजिल्स कान्वेंट स्कूल से हुुई। 12वीं डीपीएस दिल्ली से करने के बाद पुणे से लॉ की डिग्री ली। लॉ कमीशन दिल्ली की एडवाइजर बनी। 2014 में उन्होंने पहले ही प्रयास में संघ लोक सेवा की परीक्षा पास कर ली। पिता राजेंद्र पंवार डीजीसी क्रिमिनल रहे हैं। छोटी बहन तनु पंवार समाजसेवा में लगी हैं। वह दिल्ली में एनजीओ चलाती हैं।
बेटी अंजुम ने जज बन कर परिवार का नाम किया रोशन
मुजफ्फरनगर। शहर के सिविल लाइन क्षेत्र अंतर्गत हंडिया मौहल्ला निवासी हमीदा बेगम की बेटी अंजुम सैफी ने जज बन कर परिवार का नाम रोशन किया है। मुरादाबाद में तैनात न्यायिक मजिस्ट्रेट अंजुम सैफी ने अपनी सफलता का श्रेय मां और परिवार को दिया। अंजुम ने ग्रेन चैंबर इंटर कॉलेज से हाईस्कूल और एसडी इंटर कॉलेज से इंटर के बाद एसडी कॉलेज से बीकॉम और डीएवी कॉलेज से एलएलबी। मेरठ कॉलेज मेरठ से एलएमएल करने के बाद वकालत की। बचपन से ही जज बनने का सपना साकार करने के लिए कड़ी मेहनत की। परिजनों ने पूरा सहयोग किया। तीसरे प्रयास में 2016 की पीसीएस (जे) की परीक्षा उत्तीर्ण कर उसकी मेहनत रंग लाई। परिवार की इकलौती बेटी के जज बनने पर परिवार गौरवान्वित है। पति रसीद अहमद की हत्या के बाद हमीदा बेगम ने छह बेटों और बेटी अंजुम की परवरिश की। बेटी अंजुम जज बनी तथा छोटा बेटा मोहसीन सैफी यूपी पुलिस में हापुड़ में तैनात हैं। बाकी पांच बेटों को भी रोजगार उपलब्ध कराया। अंजुम कहती है कि मां की प्रेरणा से ही आज वह इस मुकाम पर है।
सेवानिवृत्त के बाद भी बेटियों को पढ़ा रही शिक्षिका संतोष
मुजफ्फरनगर। बुढ़ाना निवासी शिक्षिका संतोष ने शिक्षा विभाग में प्रधानाध्यापिका के पद से सेवानिवृत्त होने के बाद भी बच्चों को पढ़ाना नही छोड़ा। वो बालिकाओं को विभिन्न कोर्स करवाकर उन्हें रोजगार के अवसर भी प्रदान करती हैं। शिक्षिका संतोष ने वर्ष 1974 में सहायक अध्यापिका के पद पर कार्य भार ग्रहण किया था। वर्ष 2005 में वे कन्या जूनियर हाई स्कूल बुढ़ाना में पदोन्नति कर प्रधानाध्यापिका बनी 31 मार्च 2018 को सेवानिवृत्त हुई। सेवानिवृत्त होने के बाद भी वे बिना फीस और वेतन के स्कूल में पढ़ाने जाती है। चार गरीब बच्चों की पढ़ाई का खर्च भी वे उठा रही है। स्कूल समय के बाद वे स्कूल की छात्राओं को सिलाई-कढ़ाई, ब्यूटीशियन व कम्प्यूटर का कोर्स करवाकर बालिकाओं के लिए रोजगार के अवसर प्रदान करती है। वे बताती है कि कई छात्राएं बड़े-बड़े शहरों में ब्यूटीपार्लर, सिलाई का कार्य व कंप्यूटर आदि सिखाकर स्वावलंबी बन चुकी है। बेटियों को शिक्षित करने के अलावा से नशाबंदी, वृक्षारोपण कार्यक्रम में भी बढ़चढ़ कर भाग लेती है।