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भगवत कृपा से मिलता है तीर्थ दर्शन सौभाग्य: पांडये

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मोरना। डीएम अजय शंकर पांडेय ने पौराणिक शुकतीर्थ के दर्शन कर भागवत पीठ शुकदेव आश्रम में पूजा-अर्चना की। कहा कि भागवत पीठ के दर्शन की इच्छा बहुत दिनों से थी, मगर जिले के डीएम के रूप में प्रभु इच्छा पूरी करेंगे, यह कल्पना नहीं थी।
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डीएम डॉ. अजय शंकर पांडेय शुक्रवार देर शाम सपत्निक शुकतीर्थ पधारे। गंगा दर्शन के उपरांत उन्होंने भागवत पीठ शुकदेव आश्रम में अक्षय वट की परिक्रमा की। शुकदेव मंदिर में पूजा अर्चना कर स्वामी कल्याणदेव संग्रहालय का अवलोकन किया। पांडेय ने कहा कि संत और तीर्थ दर्शन अपनी इच्छानुसार संभव नहीं है। जब भगवत कृपा होती है, तभी यह सुयोग तथा सौभाग्य मिलता है। न जाने कितने वर्षों से इस स्थल पर आने की इच्छा थी। शुकतीर्थ को अपनी सेवाएं सफलता के रूप में दे सकूं। यही ईश्वर से प्रार्थना है। शिक्षा ऋषि वीतराग स्वामी कल्याणदेव देश के महान संत विभूति थे। शुकदेव संस्कृत विद्यालय के ब्रह्मचारियों ने मंत्र पाठ किया। कथा व्यास सुमन शास्त्री ने शुकतीर्थ का पौराणिक महत्व बताया। जानसठ एसडीएम विजय कुमार, सीओ राम मोहन शर्मा, अचल शास्त्री, विनोद शर्मा , राजू आदि मौजूद रहे।

जगद्गुरु स्वामी हंसदेवाचार्य के देहावसान पर संत समाज में शोक
मोरना। जगद्गुरू रामानंदाचार्य स्वामी हंसदेवाचार्य महाराज के देहावसान से शुकतीर्थ में शोक की लहर है। भागवत पीठ शुकदेव आश्रम के पीठाधीश्वर स्वामी ओमानंद महाराज ने जगद्गुरु के देहावसान पर गहरा दु:ख प्रकट किया। कहा, वीतराग स्वामी कल्याणदेव का उन्हें युवावस्था में मार्गदर्शन, सानिध्य मिला था। हरिद्धार में गीता भवन में जब भी गुरुदेव पहुंचते थे, स्वामी हंसदेवाचार्य उनसे मिलते थे। हरियाणा यात्रा में भी वह शिक्षा ऋषि के साथ रहे। शुकदेव आश्रम में आयोजित कथा व्यास स्वामी सर्वानंद की श्री मद्भगवत कथा में आखिरी बार वह शुकतीर्थ पधारे थे। हुनमतधाम के महामंडलेश्वर स्वामी केशवानंद महाराज ने कहा कि वह भारत के प्रतिष्ठित संत थे। दंडी आश्रम के संचालक स्वामी गुरुदत्त महाराज आदि संत- महात्माओं ने भी जगद्गुरु के निधन पर गहरा दु:ख व्यक्त किया है।
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