उत्तम अकिंचन धर्म की पूजा अर्चना
खतौली (मुजफ्फरनगर)। जैन मंडी मंदिर में सर्वत्र अहिंसा, शांति तथा जीव कल्याण के लिए णमोकार महामंत्र पाठ का आयोजन किया गया। रंगोली प्रतियोगिता के माध्यम से विभिन्न भावों को प्रदर्शित करते हुए मनोहारी चित्र बनाए गए।
शांतिनाथ मंदिर में बच्चों ने फास्ट फूड के दुष्प्रभाव पर नाटिका मंचन किया। भागीरथी जैन मंदिर में दो ग्रुप में वेशभूषा प्रतियोगिता का आयोजन कराया गया। पीसनोपाड़ा मंदिर में स्वाध्याय व शास्त्र सभा का आयोजन हुआ। वीतराग पाठशाला के बच्चों ने सामाजिक जागरूकता के कार्यक्रम प्रस्तुत किए। धर्मसभा में अंतसमती व आमर्षमती माता जी ने कहा अकिंचन का अर्थ है अकेला होना, कुछ भी मेरा नहीं। अकिंचन की स्थिति बनती है बाह्य और अंतरंग सभी तरह के परिग्रह के पूर्ण त्याग से। क्रोध, मान, माया, लोभ, मिथ्यात्व, धन धान्य आदि परिग्रह का पूर्ण त्याग कर देने पर जब आत्मा अकेला रह जाती है, तब प्रकट होता अकिंचन धर्म।
मौके पर सुशील, अरुण औषधि, अनिल, वीरेश, मीनू, राजीव मुखिया, मनोज, लातला सर्राफ, मुकेश, राजीव बैंक, मुकेश सर्राफ, अंचल, निशांत, रजत सराफ, राजीव, अनिमेष, धर्मपाल, सुरेंद्र, राज भैंसी, चंद्रबोस, अजय, सतेंद्र, अशोक शास्त्री, नीरज प्रवक्ता, हंसकुमार, सिद्धार्थ, इंद्र, सुषमा, निर्मला, अलका, पिंकी आदि मौजूद रहे।