सोलानी का बांध टूटने से अफरातफरी
मोरना(मुजफ्फरनगर)। खादर क्षेत्र के गांव मथाना गोवर्धनपुर में सोलानी नदी का बांध टूट जाने का पता लगते ही खादर क्षेत्र के गांवों में अफरातफरी मच गई। बाढ़ आने के भय से ग्रामीणों ने खाद्य सामग्री और पशुओं के लिए चारा एकत्र कर सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन करना शुरू कर दिया है।
राज्य की सीमा से सटे गांव मथाना गोवर्धनपुर में सोलानी नदी का बांध टूट जाने से उत्तराखंड प्रशासन ने सीमावर्ती गांवों के ग्राम प्रधानों आदि को सूचना देकर बाढ़ आने की संभावना जताई है। माना जा रहा है कि अगले 24 घंटे में बाढ़ का पानी यहां पहुंचेगा। वहीं उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड की सीमा पर बसे गांव दल्लावाला, कर्णपुर, रहीसपुर, खानपुर, प्रहलादपुर, चंदपुरी, जोगावाला, शेरपुर, माडाबेल्ला, खानपुर, बढ़ीवाला, सिताबपुरी, मजलिसपुर तौफीर, खैरनगर, महाराजनगर आदि गांवों के ग्रामीणों में बाढ़ आ जाने का भय व्याप्त हो जाने से ग्रामीणों में दहशत फैल गई है। बाढ़ के डर से बचने के लिए ग्रामीणों ने अपने कीमती सामानों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाना शुरू कर दिया है। शुक्रवार शाम से लगातार हो रही वर्षा के चलते गंगा नदी ने भी उफनना शुरू कर दिया है, जिसके चलते गांव इंछावाला, आशुखेड़ी, डुंगरपुर, शरीफपुर, खैरपुर, मुशर्रफाबाद, बरामदा, लाडपुर, भगवतीपुर, पुरुषोत्तमपुर, सुल्तानपुर, गोवर्धनपुर आदि गांवों के ग्रामीण भैंसा-बुग्गी, बैल-बुग्गी और ट्रैक्टर-ट्रॉली में अपना सामान रखकर ऊंचे सुरक्षित स्थानों की ओर जाने लगे हैं। महिलाएं और बच्चे भी घर का सामान समेटने में जुट गए हैं। प्रशासन ने भी बाढ़ की आशंका के चलते बाढ़ चौकियों को अलर्ट कर दिया है। कर्मचारियों को बाढ़ की स्थिति पर नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं।
जनप्रतिनिधि भी नहीं लेते सुध
ग्राम प्रधान आनंद चौहान, योगेश चौहान, पूर्व प्रधान वेदपाल, सुबोध, महेंद्र चौहान, योगेश मास्टर जी, डॉ बुद्धसिंह एवं गुलशनव्वर आदि ने बताया कि जनप्रतिनिधि केवल चुनाव के दौरान ही इधर से गुजरते हैं। सरकार गंगा और सोलानी के तटों पर बांध बनाकर तथा मुख्य मार्गों पर स्थित पुलियों को बड़ा बनाकर ग्रामीणों को बाढ़ के प्रकोप से बचा सकती है। प्रतिवर्ष वर्षा के दिनों में बाढ़ की आशंका बनी रहती है। नदियों में जलस्तर बढ़ने की जानकारी से ग्रामीण सहमे रहते हैं। पिछले दो दिनों से लगातार हो रही बारिश ने ग्रामीणों में बाढ़ का खौफ गहरा कर दिया है। परिवार के लोग बाढ़ के डर से रातों में जागकर गुजर रहे हैं।