एक दशक से बंद है निजी बसों का संचालन
भोपा। जट मुझेड़ा से नंहेडा़- बसेड़ा मार्ग पर करीब एक दशक से यातायात के कोई साधन नहीं है। आठ गांव के ग्रामीण अपने साधन या पैदल ही सफर तय करते है। छात्र-छात्राओं को भी इस कठिन समस्या से दो चार होना पड़ता है। सरकार ने करीब 10 वर्ष पूर्व इस मार्ग पर प्राइवेट बसों का संचालन बंद कर दिया था, तब से इस सड़क मार्ग पर यात्री बसे बंद हैं। चुनाव आते है बस संचालन की मांग उठती है, मगर मिले वादे जीत के बाद प्रतिनिधि भूल जाते है। ग्रामीणों का कहना है कि इस चुनाव मे प्रत्याशियों को पिछले किए गए वादों को पूरा नहीं करने की पोल खोलेंगे।
जटमुझेड़ा से नंहेड़ा-बसेड़ा मार्ग पर पिछले दस साल से यात्री बसों का संचालन बंद पड़ा है, जिससे इस मार्ग से जुडे़ आठ ग्रामों के ग्रामीणों व छात्र-छात्राए इस समस्या का दंश झेल रहे हैं। जट मुझेड़ा से बसेड़ा जाने वाला यह मार्ग सरकार के विकास के दावों की पोल खोल रहा है। यह मार्ग भोपा रोड स्थित जट मुझेड़ा गांव से उत्तर दिशा से शुरू होता है, जो गांव तिगरी, कसौली, बरूकी, रसूलपुर ,गादला, नन्हेड़ा, नंहेड़ी गांवों को जोड़ता हुआ गांव बसेड़ा जाता हैं। बरूकी के ग्राम प्रधान जगपाल सिंह, तिगरी के प्रधान प्रदीप सैनी, प्रधान कसौली शेर मौहम्मद, नंहेड़ा के प्रधान चौधरी दारा सिंह का कहना है कि इस मार्ग पर बसों का संचालन नहीं होने के कारण ग्रामीणों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। चुनाव के समय प्रत्याशी बड़े-बड़े वादे करते है, लेकिन जीतने के बाद किए वादे हवा-हवाई हो जाते हैं। प्रधान रसूलपुर मदनपाल सिंह, प्रधान गादला अशोक कुमार, आबाद नन्हेड़ी, सेवानिवृत लेखपाल श्यामलाल तिगरी का कहना है कि इस मार्ग पर कुछ छोटे यात्री वाहन चलते है, जिनमें लटक कर ग्रामीण बडे खतरे के साथ आवाजाही करते हैं। गांवों से बाहर शिक्षा ग्रहण के लिए जाने वाले छात्र-छात्राओं की शिक्षा भी प्रभावित हो रही हैं। यहां के ग्रामीण केवल अपने वाहनों या पैदल ही सफर तय करते हैं। काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता हैं। अन्य ग्रामीणों का भी कहना है कि इस चुनाव में यह मुद्दा वोट मांगने वाले प्रत्याशियों के सामने उठाया जाएगा।