फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

ऊंची शख्सियत पर कद को छोटा करके ही मिलते थे हसीब सिद्दीकी

विज्ञापन
विज्ञापन
देवबंद (सहारनपुर)। वर्ष 1985 में कांग्रेस पार्टी के शताब्दी समारोह के संयोजक रहे मौलाना हसीब सिद्दीकी ऊंची शख्सियत के मालिक थे। लेकिन उन्होंने इस पर कभी गुरुर नहीं किया। वह जब किसी से मिलते तो हमेशा छोटा कद करके ही मिलते थे। यही वजह है कि सर्वधर्म के लोग उन्हें बेहद सम्मान देते थे।
विज्ञापन

दारुल उलूम के शिक्षा विभाग में ऑफिस इंचार्ज रहे मो. अजीज के यहां 15 अगस्त 1939 को मौलाना हसीब सिद्दीकी का जन्म हुआ था। मौलाना हुसैन अहमद मदनी से पिता के अच्छे संबंधों की वजह थी की आखिरी समय तक मौलाना हसीब सिद्दीकी मदनी परिवार से जुड़े रहे। सिद्दीकी की प्रारंभिक शिक्षा की शुरुआत दारुल उलूम से हुई। यहां से फाजिल की डिग्री प्राप्त करने के बाद वर्ष 1955 में हाईस्कूल और वर्ष 1959 में इंटरमीडिएट की परीक्षा उत्तीर्ण की। बाद में जामिया उर्दू अलीगढ़ से अदीब व कामिल (बीए के समकक्ष) पास करके कार्य क्षेत्र में पांव रखा। मौलाना हसीब सिद्दीकी बचपन के जमाने से ही जुझारु व कार्यशील प्रवृति के रहे और इसी ताकत के बल पर वह आज तक दर्जनों संस्थाओं का कुशल प्रबंध देखते आ रहे थे। उनके नेतृत्व में मुस्लिम फंड ट्रस्ट, मदनी टेक्निकल इंस्टीट्यूट, मदनी आई हॉस्पिटल, पब्लिक गर्ल्स इंटर कालेज, कंप्यूटर सेंटर, कामर्शियल इंस्टीट्यूट समेत दर्जनों संस्थाएं चल रही हैं। उनके योग्य होने का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि वह शेखुल हिंद लाइब्रेरी के मैनेजर रहे, देवबंद रोटरी क्लब के अध्यक्ष रहे। वर्ष 1982 से 1983 तक देवबंद कांग्रेस के अध्यक्ष रहे, 30 वर्षों तक कांग्रेस पार्टी के सक्रिय सदस्य के रुप में कार्य किया। ब्याज रहित बैंकिंग सिस्टम चालू किया। वर्ष 1985 में देवबंद पत्रकार संघ के अध्यक्ष रहे, इस्लामिया विचारधारा के अध्यक्ष, मेरठ डिवीजन पत्रकार संघ के अध्यक्ष, ऑल इंडिया इक्तेसादी परिषद के के संयोजक, कांग्रेस शताब्दी समारोह के संयोजक, नगर विकास परिषद के संयोजक, राष्ट्रीय पुरातन विदयार्थी संघ दारुल उलूम के कोषाध्यक्ष, जमीयत उलमा-ए-हिंद के सदस्य और वर्तमान में कोषाध्यक्ष रहे, दि डिवीजनल रेलवे यूजयर्स कंसटेटिव कमेटी मुरादाबाद के सदस्य और वक्फ बोर्ड मसूरी के लंबे समय तक अध्यक्ष रहे। इस दौरान राजनीति में सक्रिय हुए और वर्ष 2005 में पालिकाध्यक्ष का चुनाव लड़ा। जिसमें उन्होंने जीत हासिल की थी।
बेरोजगार युवाओं को देते थे रोजगार के अवसर
देवबंद। मौलाना हसीब सिद्दीकी मुस्लिम फंड के महाप्रबंधक पद पर रहकर बेरोजगार युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराते थे। आज भी सैकड़ों युवा ऐसे हैं जो सिद्दीकी की बदौलत रोजगार पर खड़े हुए हैं। वह ऐसे युवाओं चिह्नित करते थे जो हुनरमंद तो हैं, लेकिन आर्थिक तंगी के कारण अपना रोजगार खड़ा नहीं कर पा रहे। सिद्दीकी ऐसे युवाओं को मुस्लिम फंड की ओर से मद्द करते थे जो आज उनकी बदौलत अच्छा भविष्य बनाए हुए हैं। यही नहीं मौलाना हसीब गरीब और बेसहारा लोगों के लिए आशियानों का इंतजाम भी करते थे। जिसके एक नहीं हजारों मिसालें हैं।
विज्ञापन

सच्चा हमदर्द दुनिया से रुखसत हो गया: नवाज
देवबंद। प्रसिद्ध शायर डा. नवाज देवबंदी ने मौलाना हसीब सिद्दीकी के इंतकाल पर दुख का इजहार करते हुए कहा कि आज उनका सच्चा हमदर्द दुनिया से रुखसत हो गया।
डा. नवाज देवबंदी ने कहा कि मौलाना हसीब सिद्दीकी से उनका बहुत पुराना संबंध था। पिछले लंबे समय से उनके साथ काम किया। जिसके चलते वह उनके बुजुर्ग होने के साथ ही सच्चे और अच्छे हमदर्द भी थे। कई बार ऐसा समय आया जब उन्हें सही सलाह की जरुरत पड़ी तो उस वक्त मौलाना हसीब ने उन्हें उनका मार्गदर्शन किया। उनका दुनिया से रुखसत होना बहुत बड़ा नुकसान है। सिद्दीकी को कभी भूलाया नहीं जा सकता।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें