चरथावल। मुजफ्फरनगर जिले के छोटे से कस्बे चरथावल में दो परिवारों ने ग्रामीण बच्चों को शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ाने के लिए अपनी पुश्तैनी जमीन दान में दे दी। सरस्वती शिशु मंदिर और सरस्वती विद्या मंदिर कस्बे की ऐसी दो अहम शिक्षण संस्थाएं हैं, जिनके लिए वैश्य परिवार ने पैतृक भवन एवं भूमि दान कर दी।
ग्रामीण अंचल में छात्र-छात्राओं को श्रेष्ठ और संस्कारित शिक्षा से जोड़ने के लिए लाला अशर्फी लाल और रतनदेवी के वंशजों ने बाजार कलां में स्थित अपनी हवेली सरस्वती शिशु मंदिर को सौंप दी। जिसमें 200 से ज्यादा विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। उनके पौत्र पूर्व आईएएस सुधीर कुमार खुद बच्चों को उच्च शिक्षा के लिए प्रोत्साहित करते हैं। कस्बे की दूसरी संस्था सरस्वती विद्या मंदिर हाईस्कूल की भूमि राजकुमार और अशोक कुमार ने दान दी थी। यहां 300 विद्यार्थी अपना कल संवारने में जुटे हैं। आसपास के गांवों के बच्चों में शिक्षण संस्थाएं आशा का केंद्र बन चुकी है।
शिक्षा का उजियारा फैलाने का समर्पण इतना है कि बाजार कलां में दादा अशर्फी लाल की दुकान 18 लाख में बिक्री कर पूरी रकम भी सरस्वती विद्या मंदिर के संचालन को सौंप दी। दोनों विद्यालयों के विकास को तत्पर सुधीर कुमार बच्चों से सीधा संवाद करते है। संस्थाओं के प्रबंधक अनुराग कुच्छल और आदेश गर्ग बताते हैं कि पुश्तैनी संपत्ति कस्बे की दोनों संस्थाओं को दान देकर क्षेत्र में शिक्षा की प्रगति को प्रेरक कार्य किया है। सरस्वती विद्या मंदिर हाईस्कूल के प्रधानाचार्य अवनीश कुमार और सरस्वती शिशु मंदिर के प्रधानाचार्य अनिल शर्मा ने बताया कि संस्था में उनकी उपस्थिति से विद्यार्थियों में एजूकेशन के प्रति लगन बढ़ रही है। छात्र ध्रुव सिंघल, चिराग मलिक, छात्रा नंदनी और आुयषी मानती है कि स्मार्ट क्लास आने से देहात के विद्यार्थियों का आत्म विश्वास बढ़ेगा।
अपने गुरुजनों को नहीं भूले
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चरथावल। केंद्रीय खाद्य एवं उपभोक्ता मामले मंत्रालय के पूर्व सचिव सुधीर कुमार की प्राथमिक शिक्षा कस्बे के गांधी शिशु निकेतन से हुई। वर्ष 1971 में उन्होंने गांधी इंटर कॉलेज से 12वीं उत्तीर्ण की। वीरेंद्र कुमार के परिवार में उनका जन्म हुआ। आगे की शिक्षा के लिए इलाहाबाद चले गए। प्रोफेसर ताऊ राजेंद्र प्रसाद के पास रहकर उन्होंने एमएससी उत्तीर्ण की। मेधावी सुधीर ने वर्ष 1977 में आईएफएस में सफलता पाई। देहरादून में ट्रेनिंग के दौरान आईएएस परीक्षा देने की ठानी। पहले ही प्रयास में वे चुन लिए गए और वर्ष 1978 के बैच में उन्हें यूपी कैडर मिला। उन्होंने देहरादून, पिथौरागढ़ सहित प्रदेश कई जिलों में डीएम का दायित्व संभाला। आगरा मंडलायुक्त, महानिदेशक कारागार, एमडी औद्योगिक विकास, नियुक्ति सचिव आदि उच्च पदों पर रहें। केंद्रीय प्रति नियुक्ति पर उन्होंने 2013 में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम को देश में लागू कराने में अहम भूमिका निभाई। खाद्य एवं उपभोक्ता मामले मंत्रालय से सेवानिवृत्त हुए है। वे अपने गुरुओं को नहीं भूलते। प्राइमरी स्कूल में संग्राम सिंह तथा घसीटा सिंह उनके आदर्श शिक्षक थे। गांधी इंटर कॉलेज में सीएल व्यास, राजेंद्र गौतम, शिवदत्त शर्मा की पढ़ाई उत्कृष्ट थी।
अच्छे शिक्षक से बढ़ेगी बच्चों की रुचि : सुधीर
चरथावल। पूर्व आईएएस सुधीर कुमार का कहना है कि लगन, कड़ी मेहनत और अभिभावक के प्रोत्साहन से बच्चे हर मुकाम को हासिल कर सकते है। पूर्व राष्ट्रपति डॉ अब्दुल कलाम नियमित अध्ययन से महान वैज्ञानिक बनें थे। समाज में सिविल सर्विसिज के लिए जागृति बढ़ी है। रिक्शा चालक का बेटा आईएएस बन रहा है। नई पीढ़ी को प्रेरित करें, ताकि अच्छे परिणाम मिलें। शिक्षक अच्छे होंगेे, तो बच्चों की रुचि भी बढ़ेगी। वेस्ट यूपी के खिलाड़ी एशियाड और वर्ल्ड चैंपियनशिप में चमक रहे हैं। यह अच्छा संकेत है।