ख्वाब दिखाकर अरमान कुचल रही सरकार
मुजफ्फरनगर। जेटली के पिटारे से निकले महंगाई के जिन्न ने शिक्षा और स्वास्थ्य को जकड़ लिया है। शिक्षा-स्वास्थ्य पर सेस बढ़ाकर 4 प्रतिशत किया गया है। इससे यह दोनों महंगे होंगे। इससे आम लोगों पर अधिक प्रभाव पड़ेगा। वहीं, युवाओं ने भी मोदी सरकार के आखिरी पूर्ण बजट को नकार दिया है। युवा मोबाइल, लैपटॉप महंगा करने को उचित नहीं ठहरा रहे हैं।
वैभव आनंद कहते हैं कि शिक्षा और स्वास्थ्य के हित में केंद्र सरकार भले ही बेहतर योजना लागू करने की बात कह रही हो, लेकिन मौजूदा बजट में यह कहीं नहीं है। शिक्षा पर सेस बढ़ा दिया है। जबकि मेडिकल क्षेत्र में अब अधिक बिल बनेगा। जो हर व्यक्ति को प्रभावित करेगा। सरकार का यह फैसला बदलना चाहिए। शहर निवासी अनुभव शर्मा ने कहा कि एक तो गांवों में भी वाईफाई से कनेक्ट करने की बात कही गई है, मगर मोबाइल, लैपटॉप महंगा करने का क्या औचित्य है। आधुनिक भारत का सपना दिखाकर सरकार लोगों की जेब पर डाका डाल रही है। बजट पूरी तरह से निराशाजनक है। शिखा धीमान ने कहा कि बजट में बेटियों के लिए कोई विशेष योजना नहीं दी गई है। शिक्षा, स्वास्थ्य में महिला वर्ग को कोई राहत नहीं मिली है। युवाओं को जितनी उम्मीदें थी, वह सब बजट में उलट मिली है। जूते-चप्पल, टीवी मोबाइल, खेलों के उपकरण भी महंगा किया गया है। यह छात्रों और युवाओं के हित में नहीं है। निधि तोमर ने कहा कि बजट में कोई विशेष बात नहीं है। निम्न वर्ग, मध्यम वर्ग का कोई ख्याल नहीं रखा गया है। चांदी-सोने के आभूषण भी महंगे होंगे। जबकि शिक्षा, स्वास्थ्य में सेस बढ़ाया गया है। बदलते भारत में मोबाइल, लैपटॉप महत्वपूर्ण है, मगर यही उपकरण महंगा होने से दिक्कत खड़ी होगी।