मुजफ्फरनगर। शुक्रताल में गंगा की निर्मल धारा बहने से श्रद्धालुओं की पावन गंगा में डुबकी लगाने की मनोकामना पूरी होगी। नमामि गंगे योजना में केंद्र सरकार ने बाणगंगा से शुकतीर्थ के घाट पर निर्मल गंगा जल लाने की तैयारी कर ली है। पौराणिक तीर्थ में संतों और महात्माओं की मुख्य गंगा धारा लाने की मांग कई दशक पुरानी है।
शुक्रताल भारत का ऐतिहासिक तीर्थ है। व्यास नंदन महामुनि शुकदेव ने हस्तिनापुर नरेश और अर्जुन के पौत्र राजा परीक्षित को श्राप से मुक्ति दिलाने के लिए अक्षय वृट वृक्ष की छांव में शुकतीर्थ में पहली बार अपने श्रीमुख से श्रीमद्भागवत कथा सुनाई थी। शुक्रताल में पावन वट वृक्ष टीले के पास से कभी गंगा की धारा बहती थी। वर्ष 1944 में जीर्णशीर्ण लुप्त प्राय: शुकतीर्थ के जीर्णोद्धार का संकल्प वीतराग स्वामी कल्याण देव महाराज ने लिया। उनके तप, त्याग और कर्मयोग से शुक्रताल भारत के तीर्थ मानचित्र पर प्रज्ज्वलित हो गया। बाढ़ के प्रलय के कारण गंगा खादर में शिल्ट जमा हो गई और शुक्रताल में गंगा का जल घटने लगा। गंगा स्नान मेलों के वक्त सिंचाई विभाग उत्तराखंड से गंगा की जल धारा छोड़ता है, जिससे श्रद्धालु पवित्र गंगा जल में स्नान का पुण्य अर्जित करते है। बीते कई सालों से उत्तराखंड राज्य की औद्योगिक फैक्ट्रियों से प्रदूषित जल शुक्रताल की धारा में छोड़ दिया जाता है। राज्य के गठन के बाद हिंदुओं के प्रसिद्ध तीर्थ हरिद्वार के उत्तराखंड में चले जाने पर वेस्ट यूपी में शुक्रताल ही सबसे प्रमुख तीर्थ स्थल है। भागवत सप्ताह के लिए देश-विदेश से श्रद्धालु भागवत अमृत की प्राप्ति को यहां पधारते हैं।
नमामि गंगे योजना में शुक्रताल को शामिल किया गया। पूर्व केंद्रीय राज्यमंत्री एवं सांसद डॉ संजीव बालियान ने इस संबंध में सार्थक प्रयास किया। फरवरी 2017 में केंद्रीय जल आयोग के मुख्य अभियंता एसके सिब्बल, सिंचाई विभाग उत्तराखंड के अधीक्षण अभियंता एससी जोशी तथा यूपी के एसके शर्मा आदि अधिकारियों के साथ शुक्रताल में गंगा धारा लाने के संदर्भ में उत्तराखंड के चंद्रपुरी तक भ्रमण किया था। भागवत पीठ श्री शुकदेव आश्रम के पीठाधीश्वर स्वामी ओमानंद सरस्वती ने गंगा की जल धारा के लिए प्रदेश के सीएम योगी से बीते एक साल में दो बार लखनऊ में भेंट की। उसके बाद पौराणिक तीर्थ में गंगा की धारा लाने की कवायद तेज हो गई। शुक्रतीर्थ के तट पर गंगा का पवित्र जल आने से तीर्थ की गरिमा बढ़ेगी। बताते चले कि 14 जुलाई को शुक्रतीर्थ आए केंद्रीय जल संसाधन, नदी विकास, नमामि गंगे राज्यमंत्री डॉ सत्यपाल सिंह ने बताया था कि यूपी और उत्तराखंड के सिंचाई मंत्रियों और विभागीय अफसरों की शीघ्र बैठक में शुक्रताल में गंगा धारा लाने पर अंतिम फैसला कर लिया जाएगा।