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जहां संत रहते हैं, वहां धर्म निवास करता है-चैतन्य महाराज

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मोक्ष में ममता-मोह का रहता है अभाव
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मोरना। महाशक्ति सिद्धपीठ शुक्रताल में साप्ताहिक भागवत कथा का शुभारंभ मां योगिनी राजनंदेश्वरी ने वैदिक मंत्रों के बीच दीप प्रज्वलित करते हुए कथा व्यास स्वामी सर्वेश चैतन्य महाराज का तिलक कर किया।
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भागवत कथा व्यास स्वामी सर्वेश चैतन्य महाराज ने कहा कि जहां संत रहते हैं, वहां धर्म निवास करता है। जहां धर्म की चर्चा होती हैं, वहां ज्ञान का उदय होता है। जहां ज्ञान है, वहां भक्ति की महारानी आ जाती है और जहां भक्ति है वहां भगवान विराजमान है। धर्म हमारी वहां रक्षा करता है, जहां कोई रक्षक नहीं होता। धर्म का मुख्य फल मोक्ष है। अर्थ और काम उसके गोण फल है। मोक्ष में पाप पुण्य का संबंध नहीं होता। मोक्ष किसी क्रिया का फल नहीं है। वह ज्ञान का फल है। मोक्ष में ममता मोह का अभाव रहता है। इसलिए मोक्ष को अपवर्ग कहते हैं। धन, धर्म का एक ही फल है। इसलिए धर्म को धर्म ही लगाना चाहिए। उससे अनुभव के सहित ज्ञान की उत्पत्ति होती है तथा जीव सदा के लिए मुक्त हो जाता है। जिस धन से मोक्ष प्राप्त हो सकता है, उस धन का विषय भोगों में घर गृहस्थी में उपयोग किया जा सकता है। शरीर के सुख के लिए धन को उपयोग करते हैं। मृत्यु शरीर के पीछे लगा हुआ है। यह शरीर तो मृत्यु के मुख में जाने वाला है, इसलिए मौका मिलते ही भगवान के शरणागत होने से मुक्ति के द्वार खुल जाते हैं मोक्ष मिल जाता है। वहीं, स्वामी प्रकाशानंद महाराज के सानिध्य में भागवत कथा का आयोजन में किया गया। इस मौके पर प्रसाद शर्मा, चंदा आदि मुख्य भूमिका निभा रहे हैं।
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