आत्मज्ञान ही सम्यक ज्ञान
खतौली। आचार्य भारत भूषण महाराज संघ ने नगर में मंगल प्रवेश किया। महाराज ने मंसूरपुर से पद विहार किया। जीटी रोड स्थित नसिया जी मंदिर पर भक्तों ने महाराज की अगवानी की।
पद्म प्रभु जैन मंदिर में आचार्य भारत भूषण महाराज ने भक्तों को बताया कि हमें जीवन में सत साहित्य की शरण लेनी चाहिए। सत साहित्य से प्राप्त आत्म ज्ञान कल्याण का सच्चा मार्ग बताता है। आत्म ज्ञान ही सम्यक ज्ञान है। भौतिक ज्ञान तथा भौतिकता के प्रति मोह हमें भटकाता है। राग द्वेश से भरा ज्ञान मिथ्या ज्ञान है। आत्मिक शांति के लिए देव शास्त्र व गुरु की उपासना आवश्यक है। परमात्मा की भक्ति निष्काम होनी चाहिए। जीवन में सकारात्मक मनोवृत्ति अंगीकार करो। मंगल प्रवेश के अवसर पर रामकुमार, राकेश अंबर, सतीश, अरुण, अशोक, नीरज जैन, अकलंक जैन, रतनलाल, पतेंद्र जैन, जयभगवान, जयचंद, अजय, विनोद, शीलचंद, मुकेश अंबर, राजेश जैन, मनोज, किशोर, सुशील, प्रवीण, संजय, रीतू जैन, शशि, मंजू, सरला, अलका, वैभव आदि उपस्थित रहे। इसके साथ ही श्वेतांबर मुनि राजेंद्र भी सकौती से विहार कर नगर में पहुंचे।