मुजफ्फरनगर। जनता को स्वच्छ पेयजल देने की योजना यहां विभागीय लापरवाही की भेंट चढ़ रही है। 42 पाइप पेयजल योजना यहां अधर में लटकी है। इन योजनाओं पर 113 करोड़ खर्च भी हो चुका है। गांवों में खड़ी टंकियां शोपीस बन गई हैं। जल निगम 22 कामों के पूरा होने का दावा कर रहा है, लेकिन संचालित एक भी नहीं कर पाया है। इतना पैसा खर्च होने के बाद भी जनता को एक बूंद पानी की नहीं मिल पा रही है।
भारत सरकार की पेयजल मिशन योजना में जिले में उन गांवों में पाइप पेयजल योजना पर काम चल रहा है, जिनमें पीने का पानी शुद्ध नहीं है। इस समय जनपद में 42 योजनाएं संचालित हैं। इनमें 29 ग्रामीण और 13 शहरी क्षेत्र में हैं। जल निगम इन सबकी की कार्यदायी संस्था है। जल निगम ने इन टंकियों के निर्माण के लिए शासन से 169 करोड़ की डिमांड की थी। इसके मुकाबले 113 करोड़ शासन जारी भी कर चुका है। इसमें शहरी क्षेत्र में 75 करोड़ 49 लाख और ग्रामीण क्षेत्र के लिए 93 करोड़ 70 लाख की डिमांड थी। जल निगम की बात मानें तो बीते चार माह से अधिकारी 22 काम पूरा होने का दावा करते हैं, लेकिन एक भी पाईप पेयजल योजना के माध्यम से ग्रामीणों को पानी नहीं मिल पा रहा है।
हाल में हुई पेयजल समिति और जिला पंचायत बोर्ड की बैठक में यह मामला गर्माया। जिला पंचायत अध्यक्ष से इस समस्या को लेकर पेयजल मिशन की बैठक बुलाने की मांग भी कुछ सदस्यों ने रखी थी। बड़ी बात यह है कि सरकार द्वारा इतना अधिक पैसा खर्च करने के बाद भी जनता को कोई लाभ नहीं हो पा रहा है। कहीं घटिया पाइप के फटने से पानी प्रवाहित नहीं हो पा रही है। कुछ गांवों में बिजली का कनेक्शन नहीं मिला है। कुछ में अभी पाईप बिछा ही नहीं है।
जल्द होगा संचालन
मुजफ्फरनगर। सीडीओ अंकित अग्रवाल का कहना है कि पेयजल समिति की बैठक में अधिकारियों को निर्देशित किया गया है। जिन गांवों में योजना पूरी हो गई है, उनमें पानी जनता तक पहुंचाने के लिए जल निगम के अधिकारियों से कहा गया है। टंकियों को गांव प्रधानों के सुपुर्द कर उनकी व्यवस्था बनवाई जाएगी।