अब तीसरी आंख की नजर में रहेगा एनआरएचएम विभाग
मुजफ्फरनगर। घोटालों का गढ़ बना स्वास्थ्य विभाग का राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन (एनआरएचएम) सेक्शन अब तीसरी आंख की नजर में रहेगा। तीन साल में विभाग में बड़े पैमाने के दो घोटाले सामने आ चुके हैं। दवाइयों के अधिक मूल्य पर खरीदने के मामले में भूतपूर्व सीएमओ डॉ. उमा शंकर समेत कई लोगों पर सीबीआई कोर्ट ने घोटाले के केस में सुनवाई शुरू कर दी है। वहीं, इसी विभाग पर वाहन घोटाले के मामले में भी जांच बैठी हुई है।
केंद्र सरकार ने ग्रामीणों को बीमारियों से बचाव के लिए राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन (एनआरएचएम) योजना चलाई थी। जिसके लिए जिलेवार विंग बनाई गई। स्वास्थ्य विभाग के जिम्मे लोगों को सरल उपचार किया जाना था, लेकिन एनआरएचएम को डॉक्टरों ने अपनी कमाई का जरिया बना लिया। जिले में भी एनआरएचएम विभाग में भूतपूर्व सीएमओ डॉ उमा शंकर, एसीएमओ डॉ ज्ञानेंद्र कुमार, डॉ विजय कुमार समेत शहर निवासी दवा कारोबारी अजीत सिंह पर 13 लाख रुपये का घोटाला किया है।
यह घोटाला दवाइयों को अधिक मूल्य पर खरीदने में हुआ। इस मामले में वर्ष 2013 में डॉ उमा शंकर, ज्ञानेंद्र, विजय कुमार को सरकार ने सस्पेंड कर दिया था। अब मामले की सीबीआई कोर्ट में सुनवाई होने से विभाग के पसीने छूट रहे हैं, क्योंकि मामले में कई और के नाम सामने आ सकते हैं। बाबुओं की भी धड़कनें बढ़ गई हैं। इसके अलावा भी हाल ही में एनआरएचएम विभाग में ही करीब 15 लाख रुपये का वाहन घोटाला सामने आया है। जिसमें पूर्व सीएमओ डॉ सुबोध कुमार समेत 11 लोग दोषी निकले हैं। मामले की लखनऊ से जांच की जा रही है। बीते तीन सालों में स्वास्थ्य विभाग के एनआरएचएम में करीब 28 लाख रुपये का घोटाला सामने आ चुका है। लगातार विभाग में निकल रहे घोटाले के जिन्न अधिकारियों के भी पसीने छूट रहे हैं। इसके अलावा भी गहनता से जांच-पड़ताल की जाए जो अन्य योजनाओं में भी खेल सामने आ सकता है। उधर, विभाग पर कड़ी नजर रखने के लिए सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं, क्योंकि विभाग के आला अफसरों की नजर टेढ़ी है।
पूरी बिल्डिंग में लगेंगे कैमरे
मुजफ्फरनगर। सीएमओ कार्यालय परिसर की पूरी बिल्डिंग में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे। कई विभागों में कैमरे लगा दिए गए हैं, जबकि कई बाकी हैं। विभागों में पल-पल की हलचल को कैमरों में कैद किया जाएगा।