राज्य कर्मचारी कल्याण निगम के कलक्ट्रेट डिपो इंचार्ज ने डिपो में 11 लाख से अधिक का घोटाला किया है। विभाग की ऑडिट रिपोर्ट में यह मामला सामने आया तो प्रदेश के अधिशासी निदेशक ने डिपो इंचार्ज नुरुद्दीन को सस्पेंड कर दिया। निलंबन की कार्रवाई के आदेश के बाद भी नव नियुक्त डिपो इंचार्ज को कार्यभार नहीं सौंपा।
जिले में समाज कल्याण घोटाले, विधवा पेंशन घोटाले के बाद अब राज्य कर्मचारी कल्याण निगम में घोटाले का एक बड़ा मामला सामने आया है। कलक्ट्रेट में अधिकारियों की नाक के नीचे डिपो इंचार्ज ने घोटाला कर दिया। कैशबुक में दर्ज धनराशि को बैंक में जमा नहीं किया गया और सरकारी धन का डिपो इंचार्ज प्रयोग करता रहा। वित्तीय वर्ष 2015-16 के ऑडिट में यह घोटाला सामने आया।
स्टॉक कम मिला, कैशबुक में धनराशि दर्ज मिली और खाते में पैसा जमा नहीं हुआ। कुल मिलाकर 11 लाख से अधिक का घोटाला सामने आया है। डिपो इंचार्ज ने मनमर्जी से डिपो लाभांश से मानक से अत्यधिक धनराशि वेतन एरियर ईपीएफ एवं विभिन्न मदों में व्यय किया गया। वनस्पति घी के स्टॉक बुक में वस्तुओं को फर्म को वापसी दर्शाया गया।
अंबिका घी की फर्जी वापसी दिखाकर वित्तीय अनियमितता की गई। ईपीएफ जमा नहीं किया गया। अभिलेख अपूर्ण मिले। ऑडिट रिपोर्ट के बाद अधिशासी निदेशक लखनऊ प्रकाश गुप्त ने नुरुद्दीन को दस फरवरी को सस्पेंड कर दिया था। शामली के डिपो इंचार्ज सुरेशपाल चौहान को यहां का चार्ज दिया गया। मंडलीय प्रभारी के आदेश के बाद भी आज तक सुरेशपाल को चार्ज नहीं दिया गया। सुरेश पाल ने इस संबंध में एसएसपी को नुरुद्दीन के खिलाफ घोटाले का मुकदमा दर्ज करने के लिए शिकायती पत्र दिया है।
बागपत में भी कर चुका है घोटाला
डिपो इंचार्ज प्रभारी के रूप में कार्य करते हुए बागपत में भी नुरुद्दीन पर आठ लाख रुपये से अधिक के घोटाले का आरोप था। घोटाले में कार्रवाई के बाद भी उसे मुजफ्फरनगर का कार्यभार दे दिया गया। इसके बाद उसने यहां घोटाला शुरु कर दिया।
----- कोट
घोटाले का मामला संज्ञान में आया है। निलंबित डिपो प्रभारी द्वारा चार्ज नहीं दिया जाना गंभीर मामला है। इस मामले में जो भी विधि संगत है उसके अनुसार कार्रवाई की जाएगी - सुनील कुमार सिंह, एडीएम वित्त।