नेशनल एंबुलेंस सर्विस के तहत चल रही 108 एंबुलेंस के चालक को यदि रास्ते में कोई घायल या मरीज दिखाई देता है तो वे अब मुंह मोड़कर नहीं निकलेंगे। बिना ऑनलाइन आईडी के भी मरीज को लेकर अस्पताल जाएंगे। यही स्थिति 102 एंबुलेंस पर लागू होगी। यदि उन्हें कोई मरीज रास्ते में मिलेेगा तो भी वे उसे लेकर आएंगे।
सड़कों पर होने वाली दुर्घटनाओं में घायल होने वालों के लिए 108 एंबुलेंस संजीवनी साबित हो रही है। साथ ही गर्भवती महिलाओं को अस्पताल लाने और ले जाने के लिए 102 एंबुलेंस का संचालन किया जा रहा है। इनके चलते घायल और मरीज समय पर अस्पताल पहुंच जाते हैं और उन्हें उपचार मिल जाता है, लेकिन समस्या यह थी कि अब तक 108 या 102 नंबर पर कॉल करने पर ही एंबुलेंस चालक घायल या मरीज को लेकर जाते थे।
कॉल करने पर एक ऑनलाइन आईडी जनरेट होती थी जो जिले में बने कंट्रोल रूम के माध्यम से एंबुलेंस चालक को उपलब्ध कराई जाती थी, तभी एंबुलेंस मौके पर पहुंचती थी। अब इस व्यवस्था में बदलाव कर दिया गया है। यदि कोई एंबुलेंस रास्ते में आ रही है और उसे कोई घायल नजर आ जाता है तो चालक बिना आईडी के भी मरीज को अस्पताल ला सकते हैं। अस्पताल पहुंचकर उन्हें ऑनलाइन आइडी दे दी जाएगी। सीएमओ डा. पीएस मिश्रा ने सभी एंबुलेंस संचालकों को इस संबंध में आदेश जारी कर दिए हैं।
जिले को मिली 12 नई 108 एंबुलेंस
मुजफ्फरनगर। जिले को 12 नई 108 एंबुलेंस मिली हैं। पहले से जनपद में 21 एंबुलेंस थी जिनकी संख्या बढ़कर अब 33 हो गई है। इसके अलावा 12 एंबुलेंस 102 सेवा की है तथा तीन एएलएस (एडवांस लाइफ सपोर्ट) यूनिट हैं।