मुजफ्फरनगर। वाहनों के प्रदूषण जांच प्रमाणपत्र जारी करने में जिले में बड़ा खेल चल रहा है। फर्जी तरीके से प्रमाणपत्र जारी कर वाहन मालिकों को चूना लगाया जा रहा है। जब यह प्रमाणपत्र एआरटीओ कार्यालय पहुंचता है कि इसे फर्जी बताकर नकार दिया जाता है। दरअसल 15 अप्रैल से ऑनलाइन प्रमाणपत्र जारी करने का आदेश थे, लेकिन अभी भी सामान्य तरीके से ही जारी हो रहे हैं। रोजाना ऐसे आठ से दस मामले उप संभागीय परिवहन कार्यालय पहुंच रहे हैं।
वाहनों की प्रदूषण की जांच करके उनके प्रमाणपत्र जारी किए जाते हैं। 15 अप्रैल से इस व्यवस्था को ऑनलाइन कर दिया गया। प्रदूषण जांच केंद्र केवल ऑनलाइन ही प्रमाणपत्र जारी करेंगे। इस प्रमाणपत्र को कहीं पर भी वेबसाइट के जरिए देखा जा सकता है। जिले में 27 प्रदूषण जांच केंद्र हैं। इनमें से 17 ने ही अभी ऑनलाइन प्रमाणपत्र जारी करने की स्वीकृति प्राप्त है। लखनऊ मुख्यालय से प्रमाणपत्र जारी करने की मंजूरी मिलती है। दस केंद्र अभी भी ऐसे हैं जिन्होंने ऑनलाइन प्रमाणपत्र के लिए मंजूरी नहीं ली है। इनमें से चार की फाइलें प्रक्रिया में बताई जाती हैं, जबकि बाकी छह का कुछ पता नहीं है। 15 अप्रैल से नई व्यवस्था लागू हो जाने के बावजूद बड़ी संख्या में वाहन स्वामी वाहनों के फिटनेस टेस्ट के लिए सामान्य रूप से जारी किए गए प्रमाणपत्र लेकर एआरटीओ कार्यालय पहुंच रहे हैं। इन्हें फर्जी बताकर ऑनलाइन प्रमाणपत्र लाने के लिए कह दिया जाता है।
50 से 100 रुपये तक में जारी होता हैं प्रमाणपत्र
मुजफ्फरनगर। प्रदूषण जांच का प्रमाणपत्र पेट्रोल वाहनों के लिए 50 रुपये में जारी किया जाता है, जबकि डीजल के बड़े वाहनों के लिए 80 से 100 रुपये तक लिए जाते हैं। प्रदूषण जांच केंद्र ऑनलाइन प्रमाणपत्र देने के बजाए कंप्यूटर से सामान्य तौर पर प्रमाणपत्र प्रिंट कर वाहन मालिक को दे देते हैं। इसे वेबसाइट पर नहीं देखा जा सकता।
क्यूआर कोड से करें जांच
मुजफ्फरनगर। ऑनलाइन प्रदूषण प्रमाण पत्र पर एक क्यूआर कोड होता है। इस कोड को मोबाइल पर स्कैन करके जांच की जा सकती है। कोड के स्कैन होते ही प्रदूषण प्रमाण पत्र भी सारी जानकारी आपको ऑनलाइन दिख जाएंगी।
15 अप्रैल से केवल ऑनलाइन जारी किए गए प्रदूषण जांच के प्रमाणपत्र ही मान्य है। कुछ वाहन मालिक सामान्य रूप से जारी प्रमाणपत्र लेकर आ रहे हैं, वे गलत हैं। ऐसे प्रदूषण जांच केंद्रों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी - राजीव कुमार बंसल, एआरटीओ प्रशासन।