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‘हमें इस शहर में आए अभी कुछ साल गुजरे हैं’

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‘हमें इस शहर में आए अभी कुछ साल गुजरे हैं’
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देवबंद (सहारनपुर)। मोहल्ला कायस्थवाड़ा में महफिल-ए-मुशायरा आयोजित किया गया। इसमें शायरों ने कलाम प्रस्तुत कर श्रोताओं की खूब वाहवाही बटोरी।
कार्यक्रम की शमा रोशन सभासद सैयद हारिस और जिशान नजमी ने की। शायर नदीम खान और अब्दुल्ला राज ने मुख्य अतिथि शमीम खान को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। वहीं बज्मे चिराग अदब द्वारा भी आस्ट्रेलिया से आए और देवबंद के मूल निवासी साहित्य प्रेमी मोहम्मद शमीम खान को मोहसिने अदब अवार्ड भेंट किया गया।
मुशायरे की शुरूआत नदीम अनवर की नाते पाक से हुई। शमीम किरतपुरी ने पढ़ा- ‘हमे इस शहर में आए अभी कुछ साल गुजरे हैं, मगर जो साल गुजरे हैं बड़े खुशहाल गुजरे हैं’। शम्स देवबंदी ने कहा- ‘इसलिए बोलते रहना भी जरूरी है मियां, लोग मुरदार समझ लेंगे जो खामोश रहे’। डा. नदीम शाद ने पढ़ा- ‘वो खुदा से मांगता है आप क्यों नाराज हैं, वो शराबी है तो क्या उसको भी जन्नत चाहिए’। अब्दुल्ला राज ने कहा-‘ना टूटने दिया कभी किसी का एतबारों दिल, कि जिसके हो गए उसी के राज उम्रभर रहे’। जुहेर अहमद ने पढ़ा- ‘पत्थर को भी रास्ते से हटाने में हैं शामिल, तस्वीह के दानों में मुकय्यद नहीं ईमां’।
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नाजिम अशरफ बिजनौरी ने कहा-‘फिजूल काम समझता था शायरी को मगर, यह कारोबार तो सारे जहां में फैल गया’। वली वक्कास ने पढ़ा- ‘गजल खरीदकर पढ़ते हो तान कर सीना, मुशायरों में कुछ अपना भी दबदबा रखो’। इनके अलावा डा. अनवर हसन, राशिद कमाल, डा. काशिफ अख्तर, चौकस देवबंदी, काशिफ रजा, नदीम अनवर, सुहेल शम्सी आदि ने भी कलाम प्रस्तुत किए। इस मौके पर मौ. औसाफ, जुनैद काजमी, शुऐब कुरैशी, मुईन सिद्दीकी, वसीम खान, मंसूर गौड, सरफराज राव आदि मौजूद रहे।
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