जन औषधि केंद्रों पर दवाओं का टोटा
मुजफ्फरनगर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी जन औषधि केंद्र की योजना दम तोड़ती नजर आ रही है। स्वामी कल्याण देव जिला अस्पताल और महिला अस्पताल में खुले दोनों मेडिकल स्टोर पर दवाओं का अकाल है। एक माह से भी ज्यादा समय से दवाओं की आपूर्ति नहीं है। करीब 550 दवाओं की आपूर्ति के लिए शुरू किए इन औषधि केंद्रों पर 100 दवाएं भी नहीं रहीं।
मरीजों को सस्ती दवा उपलब्ध कराने के लिए प्रधानमंत्री ने जन औषधि केंद्र की योजना शुरू की थी। इन केंद्रों पर जेनरिक दवाइयां मिलती हैं। यह ब्रांडेड कंपनियों की दवाइयों के मुकाबले यह काफी सस्ती होती है। कई दवाओं की कीमत तो 60 प्रतिशत से भी कम होती है। जिला अस्पताल और महिला अस्पताल में दो जन औषधि केंद्र संचालित हैं। इन पर दवाओं की सप्लाई शासन स्तर से होती है। मेडिकल स्टोर संचालक ऑनलाइन डिमांड भेजते हैं और तीन से चार दिन में सप्लाई आ जाती है, लेकिन एक माह से भी ज्यादा समय से व्यवस्था बेहद खराब हो गई है। जन औषधि केंद्रों पर करीब 550 दवाइयां उपलब्ध होनी थी, लेकिन वर्तमान में 100 भी नहीं हैं। करीब एक साल पहले शुरू हुए जन औषधि केंद्र पर कभी भी पूरी दवाएं पूरी नहीं हुई। अब तो स्थिति और ज्यादा खराब हो गई है। संचालक के बार-बार डिमांड भेजने के बावजूद दवाइयों की सप्लाई नहीं आ रही हैं। जन औषधि केंद्र के संचालक हिमांशु सैनी ने बताया कि एक माह से डिमांड भेजी जा रही है, लेकिन दवाइयों की सप्लाई नहीं मिल रही। इस वक्त बहुत कम दवाएं उपलब्ध हैं। इसलिए मरीजों को खाली हाथ लौटना पड़ रहा है। मरीज सस्ती दवा की उम्मीद में आता है, लेकिन उसे निराश होना पड़ता है।
चिकित्सकों का भी नहीं मिल रहा सहयोग
मुजफ्फरनगर। जिला अस्पताल के चिकित्सकों का सहयोग नहीं मिलना भी जन औषधि केंद्रों के संचालन में बड़ी रुकावट पैदा कर रहा है। चिकित्सक दवाओं का जेनरिक नाम नहीं लिखते हैं। केंद्र संचालक चिकित्सक की लिखी दवा का साल्ट नहीं समझ पाते, इसलिए उन्हें मरीजों को लौटाना पड़ता है।